गनी और खलीलजाद की राय तालिबान पर जुदा
70 के दशक में गनी और खलीलजाद लेबनान की अमेरिकन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहे थे तो स्टेनकजई भारत सैन्य अकादमी में सैन्य प्रशिक्षण ले रहे थे। हालांकि 72 वर्षीय गनी और 70 वर्षीय खलीलजाद का इतिहास साझा रहा है, लेकिन तालिबान से निपटने के मसले पर उनका दृष्टिकोण कभी समान नहीं रहा। दोनों 53 साल पहले अमेरिका में एक कार्यक्रम में मिले। 70 के दशक में बेरुत में पढ़ाई पूरी करते समय अफगानिस्तान पर युद्ध के बादल मंडराने लगे थे। इस पर दोनों फिर अमेरिका पहुंच गए।
गनी समाजवादी, खलीलजाद पूंजीवादी
- खलीलजाद ने शिकागो यूनिवर्सिटी से तो गनी ने कोलंबिया से डॉक्टरेट की। खलीलजाद कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाने लगे थे
- गनी समाजवादी आदर्श-विचार में विश्वास रखते थे तो खलीलजाद का पूंजीवाद में भरोसा था
- खलीलजाद सहमति, भागीदारी और समझौतावाद को मानते थे
गनी को अमेरिकी सहयोगी पर रहा शक
एक समय आया, जब गनी और उनके सलाहकारों को चिंता सताने लगी थी कि खलीलजाद तालिबान के साथ बात करते हुए सरकार के लिए संकट खड़ा कर रहे हैं। अफगानिस्तान पर अमेरिकी दूत बनने के बाद खलीलजाद तत्कालीन अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी से मिलने से पहले ही तालिबान नेताओं से बात कर चुके थे। गनी ने इस बारे में पूछा तो खलीलजाद ने साफ इनकार कर दिया। इसके साथ ही दोनों के बीच अविश्वास की दूरी बन गई।
स्टेनकजई: भारत में प्रशिक्षण, पाक से मिले और अब तालिबान की धुरी
भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण लेने के दौरान अफगानिस्तान में संकट जन्म लेने लगा था। मुस्लिम कट्टर विचारधारा के बीच स्टेनकजई आईएमए में प्रशिक्षण लेते रहे।
अच्छी अंग्रेजी व सैन्य कौशल
1979 में सोवियत सेना के काबुल में घुसने के बाद स्टेनकजई काबुल लौटने के बजाय पाकिस्तान जाकर सोवियत विरोधी गुट से जुड़ गए। अच्छी अंग्रेजी और सैन्य सोच-समझ की वजह गोरिल्ला कमांडर अब्दुल रब रसूल सय्याफ के नजदीकी बने।
आज प्रमुख तालिबानी वार्ताकार
90 के दशक में तालिबान ने उन्हें उप विदेश मंत्री बनाया। तालिबान सुप्रीमो मुल्ला मोहम्मद उमर की नाराजगी के कारण उन्हें हटा दिया गया। हालांकि बाद में फिर मंत्री बने। आज अमेरिका , भारत - पाक व चीन सहित दुनिया से तालिबान की वार्ताओं की धुरी बने हुए हैं।