रूस और चीन के बीच जारी युद्धभ्यास ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। दोनों देशों की सेना के करीब 10 हजार जवान पेइचिंग के पश्चिम में स्थित निंग्जिया में संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर अफगानिस्तान में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। संयुक्त सैन्य अभ्यास पर कुछ विशेषज्ञों ने तंज भी कसा है। विशेषज्ञों ने कहा कि ये दिखाबे के अलावा कुछ भी नहीं है।
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जा से जहां पूरी दुनिया हैरान और परेशान हैं। वहीं, दूसरी ओर रूस-चीन के बीच बढ़ी नजदीकियां अमेरिकी की चिंता बढ़ा रही है। सीमा विवाद समेत अन्य मुद्दों को लेकर कभी मास्को और बीजिंग के बीच छत्तीस का आंकड़ा हुआ करता था, लेकिन वक्त बदलने के साथ दोनों देशों के बीच दूरियां कम होने लगी। इन दिनों चीनी और रूसी सेना के करीब 10 हजार जवान पेइचिंग के पश्चिम में स्थित निंग्जिया में संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे हैं।
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दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों ने बयान जारी कर कहा है कि इस युद्धाभ्यास के जरिए वे चीन और रूस की सेनाओं के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि दोशों देशों का मकसद युद्ध अभ्यास नहीं, बल्कि कुछ और है। दुनिया का ध्यान खींचने के लिए देशों की सेना युद्ध अभ्यास में जुटी हुई है। इस युद्धाभ्यास का रणनीतिक महत्व इतना ज्यादा है कि इसमें रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। आमतौर पर किसी दूसरे देश में युद्धाभ्यास के दौरान रक्षा मंत्री शामिल नहीं होते हैं।
युद्ध की बारीकियां सीख रहे दोनों देशों के सैनिक
अभ्यास के दौरान दोनों देशों को नए हथियारों का परीक्षण करने और रूसी सैनिकों को पहली बार बख्तरबंद वाहनों सहित चीनी निर्मित उपकरणों का उपयोग करने का मौका मिला है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अभ्यास का मकसद आतंकवाद विरोधी क्षमताओं को बढ़ाना है। इतना ही नहीं, युद्धाभ्यास के दौरान अर्ली वॉर्निंग डेटा उपलब्ध करवाने, टोही मिशन चलाने, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में साथ देने और संयुक्त सैन्य हमलों की ट्रेनिंग कर रहे हैं।