इस बीच वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने अफगानिस्तान में वहां के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच सर्कुलेट हो रहे एक व्हाट्सएप मैसेज के बारे में खबर दी है। उस मैसेज में ये इच्छा जताई गई है कि अमेरिका हवाई हमलों के जरिए उनकी मदद करे। साथ ही उन अधिकारियों ने तालिबान पर जवाबी हमला करने का इरादा जताया है। संदेश में कहा गया है- ‘हमें अधिक हवाई शक्ति की जरूरत है। तालिबान अब खुल कर सामने आ गया है। अब इससे ज्यादा उसे बेनकाब नहीं किया जा सकता। अगर हमें दो हफ्तों तक लगातार हवाई हमलों की सहायता हमें मिले, तो उसका मतलब होगा कि तालिबान को पीछे हटने के लिए मजबूर हो जाएगा और उसे बातचीत की मेज पर लौटने के लिए मजबूर कर दिया जाएगा।’
लेकिन हवाई हमलों की सहायता के बारे में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने सिर्फ यह कहा है- ‘जहां भी संभव होगा, हम उसे उपलब्ध कराएंगे।’ पेंटागन ने अब तक यह साफ नहीं किया है कि क्या 31 अगस्त के बाद भी अफगानिस्तान में हवाई हमले किए जाएंगे। बाइडन प्रशासन की तरफ से तय समयसीमा के मुताबिक 31 अगस्त तक सारे अमेरिकी फौजियों को वापस बुला लिया जाएगा।
खबरों के मुताबिक पेंटागन ने अफगानिस्तान से अमेरिकी नागरिकों और अपने अफगान सहायकों को निकालने के लिए सात हजार सैनिकों को तैयार रहने को कहा है। उनमें से 3000 सैनिक रविवार सुबह तक काबुल पहुंच जाएंगे। अमेरिका कुछ सैनिक अपने कुवैत स्थित अड्डे से भी भेजेगा।
इस बीच एक अमेरिकी खुफिया आकलन में कहा गया है कि काबुल पर अगले 30 से 90 दिन के भीतर तालिबान का कब्जा हो सकता है। इन खुफिया एजेंसियों ने पहले अनुमान लगाया था कि ऐसा अमेरिकी फौज की वापसी के छह से 12 महीनों के बाद जाकर हो पाएगा।