पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि रोम के बाद निकट भविष्य में ऐसा कोई दूसरा अवसर नहीं है, जहां बाइडन और शी मिल पाएंगे। ऐसे में मुमकिन है कि ऐसी मुलाकात में 1993 के बाद की सबसे ज्यादा देर हो जाए। 1993 में नए राष्ट्रपति बने बिल क्लिंटन ने पद संभालने के दस महीनों के बाद जाकर चीन के राष्ट्रपति जियांग जेमिन से मुलाकात की थी। उस समय बीजिंग के तियानामेन चौराहे पर हुई प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई के कारण दोनों देश के संबंध तनावपूर्ण चल रहे थे।
विश्लेषकों के मुताबिक बाइडन और शी व्यक्तिगत रूप से एक दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं। बाइडन जब उप राष्ट्रपति थे, तब उनकी शी के साथ लंबी मुलाकात हुई थी। लेकिन राष्ट्रपति के रूप में उनकी शी से अब तक भेंट नहीं हुई है। शी ने 2019 में कोरोना महामारी आने के बाद से कोई विदेश यात्रा नहीं की है। न ही उन्होंने बीजिंग में किसी विदेशी नेता की अगवानी की है। उनकी आखिरी ऐसी मुलाकात 2020 के मार्च में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी से हुई थी।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक उससे एक चीनी सूत्र ने कहा- ‘नेताओं की आमने-सामने मुलाकात बहुत जरूरी है। चीन रोम में ऐसा अवसर गंवा देगा, जिससे वह दुनिया में और अलग-थलग पड़ सकता है।’ लेकिन एक दूसरे सूत्र ने अखबार से कहा कि निजी मुलाकात की संभावना तो नहीं है, लेकिन अमेरिका के साथ संपर्क की कोशिश की जा रही है।