विश्लेषकों के मुताबिक एसपीडी को महीनों तक सर्वेक्षणों में 15 से 17 फीसदी समर्थन मिलता रहा। इस तरह वह न सिर्फ सीडीयू-सीएसयू गठबंधन, बल्कि ग्रीन पार्टी से भी पीछे चल रही थी। शुरुआत में माना जा रहा था कि चांसलर पद के लिए मुकाबला सीएसयू के अरमिन लैशेट और ग्रीन पार्टी की अनालेना बेयरबॉक के बीच है। गौरतलब है कि इस बार मैर्केल उम्मीदवार नहीं हैं। 16 साल तक चांसलर रहने के बाद अब उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने का फैसला किया है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक अरमिन लैशेट को चुनाव अभियान के दौरान कई गलतियां करने का खामियाजा भुगताना पड़ रहा है। हाल में जब जर्मनी में भीषण बाढ़ आई, तब बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए हुए एक कार्यक्रम के दौरान लैशेट हंसते हुए देखे गए। वह वीडियो देशभर में वायरल हुआ था। उधर ग्रीन पार्टी का समर्थन अब घट कर 17 फीसदी रह गया है, जो एक समय 26 फीसदी तक पहुंच गया था। जर्मनी में आम चुनाव के लिए मतदान 26 सितंबर को होगा।
शोल्ज ये आरंभ से कहते रहे हैं कि जब चुनाव अभियान जोर पकड़ेगा, तब मतदाता इसे महसूस करेंगे कि उनके सामने मौजूद विकल्पों के बीच वे ही सबसे ज्यादा अनुभवी हैं। एसपीडी वर्तमान सरकार में सीडीयू-सीएसयू के साथ गठबंधन में रही है। मैर्केल की सरकार में शोल्ज वित्त मंत्री हैं। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ताजा अफगान संकट का लाभ भी शोल्ज को मिल रहा है। जनमत सर्वे में 39 फीसदी मतदाताओं ने कहा कि शोल्ज के पास ऐसे संकट से निपटने का अनुभव है। जबकि लैशेट और बेयरबॉक के बारे में ऐसी राय सिर्फ 16-16 फीसदी मतदाताओं ने जताई।