यह भी ध्यान दिलाया गया है कि जापान के रक्षा मंत्री किशी की ताजा वियतनाम यात्रा अगस्त में अमेरिकी उप राष्ट्रपति कमला हैरिस की हुई वियतनाम यात्रा के बाद हुई है। हैरिस ने वियतनाम से कहा था कि वह दक्षिण चीन सागर में चीन के जोर-जबर्दस्ती वाले व्यवहार का मुकाबला करने में अमेरिका का साथ दे। गौरतलब है कि जापान इस क्षेत्र में अमेरिकी खेमे का एक महत्त्वपूर्ण देश है।
वेबसाइट एशिया टाइम्स के मुताबिक हैरिस की यात्रा के समय वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह ने वियतनाम स्थित चीनी राजदूत शियोंग बो को आश्वासन दिया था कि वियतनाम चीन के खिलाफ मोर्चेबंदी में शामिल नहीं होगा। लेकिन इस वेबसाइट पर छपे एक विश्लेषण के मुताबिक अब वियतनाम ने अमेरिकी खेमे के एक अहम देश के साथ जो रक्षा समझौता किया है, उसे अवश्य ही चीन के खिलाफ समझा जाएगा।
इस विश्लेषण में ध्यान दिलाया गया है कि इस समझौते की घोषणा उसी समय हुई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने क्वैड्रैंगुलर सिक्युरिटी डायलॉग (क्वैड) के सदस्य देशों की शिखर बैठक आयोजित करने का फैसला किया। ये बैठक शुक्रवार को होगी, जिसमें अमेरिका के अलावा भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के नेता भाग लेंगे। इन तमाम देशों के चीन के साथ संबंध तनावपूर्ण हैँ।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक जापान और वियतनाम के बीच पहले से मजबूत आर्थिक संबंध हैं। अब ताजा समझौते के साथ इसमें रक्षा संबंध का पहलू जुड़ा है। जानकारों का कहना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में जापान अब सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वियतनाम जैसे ही समझौते उसने फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया ने भी किए हैं। इन सभी को चीन की घेराबंदी का हिस्सा समझा गया है।