अब ताइवान ने कहा है कि सीपीटीपीपी में उसकी अर्जी को चीन से अलग कर देखा जाना चाहिए। उसने दावा किया कि उसके पास एक संपूर्ण बाजार तंत्र है। वह कानून के शासन और निजी संपत्ति का सम्मान करता है। साथ ही वह सीपीटीपीपी के नियमों का पालन करने को तैयार है।
ताइवान के कुल अंतरराष्ट्रीय कारोबार में 24 फीसदी हिस्सा सीपीटीपीपी के सदस्य देशों के साथ होने वाले कारोबार का है। सिंगापुर स्थित नोट्रे डेम लिउ इंस्टीट्यूट फॉर एशिया एंड एशियन अफेयर्स से जुड़े विशेषज्ञ सीन किंग के मुताबिक सीपीटीपीपी का कोई भी एक सदस्य किसी नए देश की सदस्यता की अर्जी को रोक सकता है। इसलिए अब चीन उस देश की तलाश करेगा, जो ताइवान की सदस्यता को रोक दे। उन्होंने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘न्यूजीलैंड और सिंगापुर का हालांकि ताइवान के साथ प्रभावी मुक्त व्यापार संबंध है, लेकिन उन दबाव पड़ेगा कि वे ताइवान की सदस्यता को वीटो कर दें।’
किंग ने बताया कि जापान और ऑस्ट्रेलिया ताइवान की सदस्यता का पुरजोर समर्थन करेंगे, जबकि मलेशिया ऐसा ही समर्थन चीन की सदस्यता अर्जी को देगा। कनाडा का क्या रुख रहेगा, अभी नहीं कहा जा सकता। इनके अलावा ब्रूनेई, चिली, मेक्सिको, पेरू और वियतनाम सीपीटीपीपी के सदस्य हैं।