चीन स्थित भारतीय दूतावास ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट में चीन में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) को प्रकाशित किया है। ऐसा इसलिए, ताकि छात्रों को चीन के अलग अलग कॉलेज से प्राप्त दस्तावेजों के सत्यापन से संबंधित प्रक्रियाओं के बारे में सूचित किया जा सके।
भारतीय दूतावास ने दी जानकारी
भारतीय दूतावास ने बुधवार को इस बारे में तमाम जानकारी अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित की। बता दें कि वर्ष 2016, 2017 और 2018 बैच के भारतीय छात्र जून और जुलाई के महीने में चीन में अपनी शिक्षा पूरी करने जा रहे हैं। भारतीय दूतावास ने शंघाई और ग्वांगझू में छात्रों को दिए जाने वाले शुल्क के अलावा दस्तावेजों के सत्यापन से संबंधित प्रश्नों का उत्तर दिया है।
पिछले महीने किया गया था भारतीय छात्रों से संवाद
बता दें कि चीन स्थित भारतीय दूतावास ने मई में भारत के छात्रों के साथ एक संवाद किया था। खासतौर पर उन छात्रों से बातचीत की गई थी, जिन्हें कोविड -19 के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ा। चीन में भारत के राजदूत प्रदीप कुमार रावत ने बैठक में छात्रों को होने वाली समस्या और उनके अनुभवों के बारे में बातचीत की। भारतीय दूतावास के सचिव अमित शर्मा ने छात्रों को बताया कि चीन में पढ़ाई के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही दूतावास द्वारा दी जाने वाली अलग-अलग सेवाओं पर भी एक प्रस्तुति दी गई।
अधिकारियों का कहना है कि कोरोना वायरस की पहली लहर से पहले यानी वर्ष 2020 की शुरुआत में चीन में करीब 23,000 भारतीय छात्र चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे थे। इस समय यह संख्या घटकर 8 हजार पहुंच गई है। कोविड-19 के बाद लॉकडाउन के समय भारतीय छात्र स्वदेश लौटे लेकिन, चीन के वीजा प्रतिबंधों के कारण 2023 तक वापस नहीं लौट सके। इसके बाद भारतीय दूतावास ने इस संबंध ने चीन के अधिकारियों से बात की थी। इसके बाद भारतीय छात्रों को चीन में वापस लौटने की अनुमति दी गई थी।