अमेरिका में पांच नवंबर को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में रिपब्लिकन की ओर से डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट्स की तरफ से कमला हैरिस मैदान में हैं। उपराष्ट्रपति हैरिस के लिए फंड जुटाने वाले एक भारतीय-अमेरिकी शख्स ने खास इच्छा जताई है। उन्होंने अनुरोध किया है कि अगर वह राष्ट्रपति चुनाव जीत जाती हैं तो वह अपनी मां के घर चेन्नई घूमने जाएंगी।
अगर वह राष्ट्रपति चुनी जाती हैं...
एशियन अमेरिका पैसिफिक आइलैंडर्स (एएपीआई) विक्ट्री फंड के संस्थापक शेखर नरसिम्हन ने कहा, 'अगर वह राष्ट्रपति चुनी जाती हैं तो मैं पीछे पड़ जाऊंगा और कहूंगा चलो भारत चलते हैं। आपको चेन्नई जाना होगा। आप दिल्ली जा सकते हैं। दिल्ली मेरे लिए ठीक है। आपको यह सब करना होगा, मगर आपको चेन्नई जाना होगा।'
बचपन में जाती थीं चेन्नई घूमने
बता दें, हैरिस की मां श्यामला गोपालन का गृहनगर चेन्नई है। श्यामला 16 साल की उम्र में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चली गई थीं। हैरिस के पास चेन्नई की काफी यादें हैं। यह एक ऐसा शहर है, जहां वह अक्सर अपने बचपन में घूमने जाती थीं। 2009 में हैरिस अपनी मां की अस्थियां लेकर चेन्नई आई थीं और फिर उन्हें हिंद महासागर के पानी में बहा दिया था।
मेरे लिए यह एक सपना: नरसिम्हन
नरसिम्हन ने कहा, 'मैंने एक लेख लिखा था कि मेरी मां और उनकी मां चेन्नई से हैं। मेरे लिए सपना यह है कि वह राष्ट्रपति हैं और हम चेन्नई जा रहे हैं। उनका जोरदार स्वागत किया जा रहा है। उन्हें यह सम्मान मिलना भी चाहिए। अगर बिल क्लिंटन को यह मिल सकता है, तो आप अपनी बेटी का स्वागत क्यों नहीं करेंगे? इसलिए हां, (भारतीयों के बीच) उत्साह होना चाहिए।'
भारत के लिए क्या महत्वपूर्ण
उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि नकारात्मक पक्ष हमेशा यही रहेगा कि वह हमारे लिए क्या कर रही है? वह हमसे किस तरह अलग है? अमेरिकी विदेश नीति को अमेरिकी हितों के अनुसार तय किया जाना चाहिए, चाहे दुर्भाग्य से हो या सौभाग्य से। मैं भारतीय विदेश नीति के बारे में भी यही सोचता हूं। मैं हमेशा यह तर्क देता हूं कि भारतीय विदेश नीति को इस बात से तय किया जाना चाहिए कि भारत के लिए क्या महत्वपूर्ण है।'
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'तो, चलो वयस्क ही बने रहें, लेकिन यहां आपके पास एक भावनात्मक जुड़ाव है। चलो इसका लाभ उठाएं। चलो इस पर काम करते हैं और कहते हैं कि हम इसे अगले स्तर पर कैसे ले जा सकते हैं? हम एक ऐसी साझेदारी कैसे बना सकते हैं जो विश्वास और आपसी समझ पर आधारित हो?'