विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत रूस और यूक्रेन दोनों के साथ बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसका मकसद यह देखना है कि ऐसा क्या कुछ किया जा सकता है, जो संघर्ष को समाप्त करने और गंभीर वार्ता शुरू करने में मदद करे। जयशंकर ने यह भी कहा कि युद्ध विवादों को सुलझाने का तरीका नहीं है और समाधान जंग के मैदान से नहीं निकलता है।
जयशंकर मंगलवार को न्यूयॉर्क में एशिया सोसायटी और एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम का विषय 'भारत, एशिया और दुनिया' रखा गया था। बातचीत के दौरान जयशंकर ने कहा, हमारा मानना है कि जंग विवादों का समाधान नहीं है। हमें नहीं लगता कि जंग के मैदान से कोई समाधान निकलेगा।
उनसे जब पूछा गया कि भारत इस विवाद को खत्म करने में किस तरह से मदद कर रहा है, तो जयशंकर ने कहा, हम मानते हैं कि किसी बिंदु पर बातचीत होगी और ऐसी बातचीत में सभी पक्षों को शामिल करना होगा। यह एकतरफा बातचीत नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा, हम रूसी और यूक्रेनी सरकारों के साथ मॉस्को, कीव और अन्य स्थानों पर बातचीत कर रहे हैं, ताकि यह देखा जा सके कि हम क्या कुछ ऐसा कर सकते हैं, जो संघर्ष को समाप्त करने में तेजी लाने और गंभीर वार्ता शुरू करने में मदद करे।
उन्होंने कहा कि यह एक तरह की खोज है, जो भारत कर रहा है। विदेश मंत्री ने कहा, ऐसा नहीं है कि हमारे पास कोई शांति योजना है। हम कुछ भी सुझाव नहीं दे रहे हैं। हम बातचीत कर रहे हैं और उन्हें दूसरे पक्ष के साथ साझा कर रहे हैं। मेरे ख्याल में दोनों पक्ष इसकी सराहना कर रहे हैं।
पीएम मोदी के अमेरिका दौरे किया जिक्र
जयशंकर ने हाल के महीनों में भारतीय नेतृत्व की मॉस्को और कीव के साथ हुई कई बैठकों का जिक्र किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को न्यूयॉर्क में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अपने तीन दिवसीय अमेरिका दौरे के दौरान क्वाड नेताओं की बैठक में भाग लिया और संयुक्त राष्ट्र के 'समिट फॉर द फ्यूचर' में संबोधन दिया।
तीन महीने के भीतर तीन बार जेलेंस्की से मिले पीएम
मोदी और जेलेंस्की के बीच तीन महीने के भीतर तीसरी बार मुलाकात हुई। प्रधानमंत्री ने पिछले महीने कीव में जेलेंस्की से मुलाकात की थी। उससे पहले उन्होंने रूस दौरे के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की। मोदी ने जून में इटली में जी7 सम्मेलन के दौरान जेलेंस्की के साथ एक द्विपक्षीय बैठक की थी। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने भी इस महीने की शुरुआत में रूस का दौरा किया।
भारत के पास दोनों देशों से जुड़ने की क्षमता
जयशंकर ने कहा, हम मानते हैं कि ये बातचीत फायदेमंद होती हैं और कुछ किया जा सकता है। इस समय बहुत से देशों और नेताओं के पास दोनों देशों से एकसाथ जुड़ने की क्षमता या इच्छाशक्ति नहीं है। इसलिए मुझे लगता है कि हम एक महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
भारत-रूस संबंधों पर कही ये बात
विदेश मंत्री से जब भारत और रूस संबंधों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि रूस वर्तमान में एशिया की ओर अधिक झुक रहा है, जिससे भारत के लिए आर्थिक हित सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत के लिए रूस के साथ संबंध एक भू-राजनीतिक और आर्थिक मामला बन गया है। उन्होंने आगे कहा, यह एक बहुध्रुवीय दुनिया है, जहां विभिन्न ध्रुव एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं। अब हम एक ऐसी दुनिया नहीं है, जहां संबंध विशेष होते हैं। हर देश अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से सर्वोत्तम लाभ हासिल करना चाहता है।
'पश्चिमी देशों ने दिया था पाकिस्तान का साथ'
उन्होंने यह भी बताया कि देश की आजादी के बाद से भारत के सोवियत संघ और फिर रूस के साथ सकारात्मक संबंध रहे हैं। उन्होंने जिक्र किया कि शीत युद्ध के दौरान जब पश्चिमी देश पाकिस्तान का समर्थन कर रहे थे, तब भारत ने सोवियत संघ के साथ रक्षा साझेदारी की थी। जयशंकर ने भारत के प्राकृतिक संसाधनों की खपत पर जोर देते हुए कहा कि उर्जा जरूरतों के लिए रूस, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और खाड़ी देशं जैसे प्राकृतिक संसाधन निर्यातकों का विशेष महत्व है।