लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि एसपीडी की तरफ से चांसलर पद के उम्मीदवार ओलफ शोल्ज एक मध्यमार्गी नेता हैं। उन्हें अंगेला मैर्केल जैसा ही सबको साथ लेकर चलने वाला नेता समझा जाता है। आम समझ यह भी है कि एसपीडी का रंग अब पहले की तरह ‘लाल’ नहीं रह गया है। यानी उसका वामपंथी तेवर काफी फीका हो चुका है। टैक्स से लेकर यूरोपीय एकता तक जैसे सवालों पर एसपीडी मध्यमार्गी सोच पर चलती रही है। वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू के एक विश्लेषण में बताया गया है कि एसपीडी के ज्यादातर कार्यकर्ता एफडीपी के साथ गठबंधन बनाने का समर्थन करेंगे।
एफडीपी के नेता क्रिश्चियन लिंडनर बाजार को लोगों का सबसे अच्छा दोस्त मानते हैं। उनकी पार्टी धनी लोगों और कंपनियों के लिए टैक्स में कटौती की समर्थक है। वे बाजार को सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त करने के पक्षधर भी हैं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर संभावना के मुताबिक एसपीडी ने एफडीपी के साथ गठजोड़ किया, तो ‘लाल आतंक’ की बात बेबुनियाद साबित हो जाएगी।
लेकिन दक्षिणपंथी खेमे दूसरी तरह के गठबंधन की संभावना को लेकर चिंतित हैं। एसपीडी ने इस संभावना से इनकार नहीं किया है। कंजरवेटिव जर्मन लेखक मूलर-वॉग ने कहा है- ‘एसपीडी-ग्रीन-लेफ्ट का गंठबंधन एक अंधकारमय सूरत पेश करेगा। बेशक वो सरकार कम्युनिस्ट नहीं होगी, फिर भी वह अर्थव्यवस्था, कल्याणकारी राज्य और विदेश नीति के प्रति देश के नजरिए को बुनियादी रूप से बदल देगी। डर यह है कि तब यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धा की क्षमता बहुत घट जाएगी।’