फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Covid 19: विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले अलर्ट करता तो दुनिया में रुक सकती थी तबाही

अमर उजाला रिसर्च टीम Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 13 May 2021 06:39 AM IST

सार

  • स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पैनल ने कहा, विभिन्न देशों की सरकारें जागरूक होतीं तो लाखों लोगों को कोरोना महामारी से बचाया जा सकता था
विज्ञापन
विज्ञापन
दुनियाभर में कोरोना वायरस से होती मौतें... - फोटो : सोशल मीडिया


इनका जवाब हां में देते हुए महामारी से बचाव और तैयारी के लिए बने एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पैनल ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर कोविड19 के प्रबंधन में हुई खामियों को बताते हुए नई पारदर्शी व्यवस्था लाने की सिफारिश की गई है। 


रिपोर्ट में कहा गया है, जानलेवा कोरोना वायरस और खराब तालमेल की वजह से चेतावनी के संकेत अनसुने कर दिए गए। विश्व स्वास्थ्य संगठन और पहले महामारी को लेकर अलर्ट कर सकता था। एक के बाद एक खराब निर्णयों की वजह से वायरस अब तक करीब 33 लाख लोगों की जान ले चुका है। साथ ही, वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी तबाह कर दिया है।


हर स्तर पर हुई देरी : सरलीफ 

न्यूजीलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री हेलन क्लार्क और लाइबेरिया की पूर्व राष्ट्रपति व 2011 में नोबेल विजेता एलेन जॉनसन सरलीफ के अंतरराष्ट्रीय पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कई खामियों को रेखांकित किया है। 


सरलीफ ने मीडिया को बताया कि दुनिया आज जिस स्थिति में है, उसे रोका जा सकता था। नाकामियों, इसके अंतराल, तैयारी और प्रतिक्रिया में देरी के कारण हम आज इस हालात में पहुंचे हैं। शुरुआती और तेजी से कार्रवाई तो की गई, लेकिन इसमें देरी ने नुकसान किया।


रिपोर्ट के जरिए सामने आई कुछ अहम खामियां इस प्रकार हैं 


1- महामारी की घोषणा में देरी 

क्योंकि 1 कोविड-19 को महामारी घोषित करने में काफी समय लगाया। 30 जनवरी तक चीन के हालात विकट हो चुके थे और विश्व के लिए खतरा बन चुके थे। महामारी की घोषणा 11 मार्च को की गई।


2- यात्राओं पर रोक नहीं लगी

डब्ल्यूएचओ की आपात समिति ने तत्काल यात्राओं पर रोक लगाने की सिफारिश नहीं की। ऐसा करते तो महामारी की सीमित रखा जा सकता था।


3- सरकारें भी विफल

विभिन्न देशों की सरकारें 30 जनवरी तक हालात को समझ नहीं पाई। 30 जनवरी को सबसे जोरदार चेतावनी दी गई, लेकिन वाजिब कदम नहीं उठाए गए। 11 मार्च को डब्ल्यूएचओ ने महामारी घोषित किया, लेकिन तक तक कई सरकारें सोती रहीं।
विज्ञापन


अमीर देश गरीबों को दान करें टीका

रिपोर्ट में वर्तमान महामारी से निपटने के कई सुझाव भी हैं। तेजी से वैश्विक टीकाकरण इसमें प्रमुख है। अमीर देशों से गरीब देशों को एक अरब टीके की खुराक दान करने का आह्वान किया गया, पैनल ने अपनी रिपोर्ट में दुनिया के सबसे धनी राष्ट्रों से अगली महामारी की तैयारी के लिए समर्पित नए संगठनों को आर्थिक मदद मुहैया कराने की भी बात कही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next