याहू न्यूज के एक ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक 40 फीसदी लोगों ने सैन्य वापसी का समर्थन किया, जबकि सिर्फ 28 फीसदी ने विरोध किया। हालांकि इसी सर्वे में जुलाई में सैन्य वापसी के समर्थकों की संख्या 50 फीसदी रही थी। उधर एक मॉर्निंग कंसल्ट/पॉलिटिको सर्वे में देखा गया कि अभी 49 फीसदी लोग सैन्य वापसी के फैसले के साथ हैं, जबकि 37 प्रतिशत इसके खिलाफ हैं। लेकिन अप्रैल में समर्थकों की संख्या 69 फीसदी थी।
विश्लेषकों ने इस सर्वेक्षण के नतीजों के आधार पर कहा है कि अभी बने प्रतिकूल माहौल के कारण सैन्य वापसी के समर्थकों की संख्या गिरी है। लेकिन अभी भी ज्यादातर लोग राष्ट्रपति बाइडन के निर्णय का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में डेमोक्रेटिक पार्टी की ये उम्मीद सही है कि मौजूदा माहौल बदलते ही समर्थकों की संख्या और बढ़ जाएगी।
फिलहाल, बाइडन प्रशासन से कठिन प्रश्न पूछे जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अगर तालिबान दो या तीन महीने बाद काबुल पर कब्जा करता, तो ये सवाल नहीं उठता। लेकिन राष्ट्रपति बाइडन के तमाम अनुमानों को गलत ठहराते हुए उसने जितनी तेजी से उसने पूरे देश पर कब्जा जमा लिया, उससे अफगानिस्तान में 20 साल तक अमेरिकी फौज की मौजूदगी कठघरे में खड़ी हो गई है।