संयुक्त राष्ट्र की संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने कहा है कि ईरान ने 55.6 किलोग्राम ऐसा यूरेनियम तैयार कर लिया है, जो 60 फीसदी संवर्धित है। एजेंसी के मुताबिक इसका मतलब यह है कि ईरान 25 किलोग्राम 90 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम तैयार करने में सक्षम हो चुका है। इतना यूरेनियम परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त होगा। आईएईए की इस रिपोर्ट से पश्चिमी वैज्ञानिक हलकों में हलचल मच गई है।
विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि परमाणु बम बनाने की एक से अधिक विधियां मौजूद हैं। वैज्ञानिकों की संस्था- यूनियन ऑफ कन्सर्न्ड साइंटिस्ट्स ने कहा है कि 15 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम उपलब्ध होने पर भी विखंडन विधि से परमाणु बम बनाया जा सकता है। इस संस्था ने ध्यान दिलाया है कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान के शहर हिरोशिमा पर गिराया गया परमामु बम 64 किलो संवर्धित यूरेनियम से बना था। लेकिन उसके बाद से टेक्नोलॉजी का काफी विकास हो चुका है।
विशेषज्ञों के मुताबिक संवर्धित यूरेनियम-235 से परमाणु बम तैयार होता है, लेकिन इससे ही प्लूटोनियम बम भी बनाया जा सकता है। ऐसी खबरें हैं कि ईरान ये दोनों बम बनाने की कोशिश में जुटा हुआ है। ये आशंका भी जताई गई है कि ईरान ने किसी दूसरे स्रोत से प्लूटोनियम हासिल कर लिया है।
उत्तर कोरिया प्लूटोनियम के उत्पादन में सक्षम है। उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग से लगभग 100 किलोमीटर स्थित योंगब्योन में उत्तर कोरिया प्लूटोनियम संचालित रिएक्टर है। उत्तर कोरिया और ईरान ने सीरिया में इस रिएक्टर जैसा ही रिएक्टर लगाने की कोशिश की थी, लेकिन 2007 में अचानक हमला कर इजराइल ने उसे नष्ट कर दिया था।
ईरानी संसद की ऊर्जा समिति के सदस्य फेरेदून अब्बासी ने इस हफ्ते कहा कि ईरान को यूरेनियम संवर्धित करने के साथ ही प्लूटोनियम रिएक्टर भी लगाना चाहिए। उऩ्होंने कहा कि प्लूटोनियम रिएक्टर का मकसद शांतिपूर्ण होगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने उनके बयान को खतरे का संकेत माना है।
वेबसाइट एशिया टाइम्स पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अब ये बात ठोस महसूस होती है कि ईरान परमाणु हथियारों का जखीरा तैयार करने में सक्षम हो गया है। लेकिन उसे इस बात का अहसास है कि वह परमाणु बम के लिए यूरेनियम का पर्याप्त संवर्धन करते रहने में कभी कामयाब नहीं होगा। इसीलिए उसे प्लूटोनियम की जरूरत महसूस हुई है।
आईएईए का आकलन है कि एक या दो साल में ईरान छोटे आकार के परमाणु बम बनाने में सफल हो जाएगा। उन बमों की क्षमता उत्तर कोरिया के परमाणु बमों जितनी होगी। उत्तर कोरिया के पास जो परमाणु बम हैं, उनकी क्षमता हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु हथियारों से बराबर है।
विश्लेषकों के मुताबिक ईरान ने अपना ज्यादातर परमाणु हथियार कार्यक्रम को निरीक्षकों की पहुंच से दूर रखा है। इसलिए उसके पास असल में कितनी क्षमता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल बना रहा है। लेकिन इस संभावना को ठोस माना जा रहा है कि प्लूटोनियम बम बनाने में उत्तर कोरिया उसकी मदद कर रहा है।