विश्लेषकों ने कहा है कि चुनाव नतीजा चाहे जो हो, अब तक के ट्रेंड से एक बात साफ है कि जर्मनी में परंपरागत दो दलीय प्रणाली अब भंग हो गई है। तीन प्रमुख पार्टियां 20 फीसदी वोट के आसपास बनी हुई हैं। इसका मतलब यह है कि चुनाव के बाद उभरने वाली सूरत जटिल होगी। विश्लेषकों के मुताबिक संभव यह है कि चुनाव के बाद सीडीयू/सीएसयू गठबंधन एसपीडी से हाथ मिला ले। यह भी मुमकिन है कि इस बड़े गठबंधन में ग्रीन पार्टी भी शामिल हो जाए।
जिस दूसरी सूरत का अनुमान लगाया जा रहा है, उसके मुताबिक सीडीयू-सीएसयू गठबंधन फ्री डेमोक्रेट्स नाम की पार्टी के साथ मिल कर सरकार बना सकता है। ग्रीन पार्टी इस गठबंधन में भी शामिल हो सकती है। जर्मनी में चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर होते हैं। इसलिए अकसर किसी पार्टी के लिए पूर्ण बहुमत हासिल करना मुश्किल बना रहता है।
जर्मनी यूरोपियन यूनियन के भीतर सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। अंगेला मैर्केल के दौर में जर्मनी ने अमेरिका का पिछलग्गू रहने के बजाय स्वतंत्र नीति अपनाई। मैर्केल ने रूस और चीन के साथ जर्मनी के संबंध मजबूत किए। इसलिए विश्लेषकों ने कहा है कि 26 सितंबर को होने वाले चुनाव के नतीजे का जो बाइडन, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन को भी बेसब्री से इंतजार रहेगा।