पर्यवेक्षकों के मुताबिक एक विकल्प यह है कि एसपीडी ग्रीन पार्टी और एफडीपी के साथ मिल कर सरकार बनाए। लेकिन ग्रीन पार्टी और एफडीपी की नीतियां एक दूसरे के खिलाफ हैं। ऐसे में उस तरह के गठबंधन की संभावना टेढ़ी खीर साबित होगा। ग्रीन पार्टी के नेता रॉबर्ट हेबेक ने चुनाव नतीजों के एलान के बाद कहा- ‘हम ऐसा गठबंधन चाहते हैं, जो आगे की चुनौतियों का मुकाबला कर सके।’
ग्रीन पार्टी की तरफ से अनालीना बेयरबॉक इस चुनाव में चांसलर पद के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरी थीं। नतीजों के एलान के बाद उन्होंने कहा- ‘चाहे जो भी समीकरण बनें, ग्रीन पार्टी अपनी इस मांग से पीछे नहीं हटेगी कि जलवायु परिवर्तन के मुकाबले को राजनीतिक एजेंडे में सबसे ऊपर रखा जाए।’ उन्होंने कहा- ‘राजनीति कोई बाजार नहीं है।’
हालांकि इस चुनाव में सबसे ज्यादा लाभ ग्रीन पार्टी को हुआ, लेकिन फ्री डेमोक्रेट्स के वोट भी इस चुनाव में बढ़े हैं। अब पार्टी ने कहा है- ‘अब बहुत आत्म निर्भर हैं। हमने दो अंकों में वोट प्रतिशत प्राप्त करने वाली पार्टियों में खुद को शामिल कर लिया है। अब हम मध्यमार्गी गठबंधन बनाने के क्रम में अपनी स्वतंत्रता का इस्तेमाल करेंगे।’ पर्यवेक्षकों ने ग्रीन पार्टी और एफडीपी के इन बयानों में मौजूद विरोध भाव की तरफ ध्यान खींचा है। उनका कहना है कि इसे देखते हुए एसपीडी या सीडीयू के लिए एक दूसरे को छोड़ कर कोई अलग गठबंधन बना लेना बेहद मुश्किल दिखता है।