प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी जी20 देशों के नेताओं ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग के खिलाफ जंग में वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) को अपना पूर्ण समर्थन देने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं से लड़ने के लिए मानकों को प्रभावी तरीके से लागू करना जरूरी है। इससे सतत रिकवरी और अंतरारष्ट्रीय वित्त व्यवस्था की अखंडता की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और वित्तीय बाजारों में विश्वास बनेगा।
रविवार को जी20 शिखर सम्मेलन में जारी हुई रोम की घोषणा में कहा गया कि सभी नेताओं ने मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी वैश्विक रुख की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने पेरिस के टेरर फंडिंग वाचडॉग की सिफारिशों पर भी जोर दिया जो वित्तीय समावेश को प्रोत्साहित करती हैं।
एफएटीएफ एक अंतर-सरकारी निकाय है जिसकी स्थापना साल 1989 में मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्त व्यवस्था की अखंडता के लिए खतरे से संबंधित अन्य मुद्दों से निपटने के लिए किया गया था। पड़ोसी देश पाकिस्तान अभी भी एफएटीएफ की ग्रे सूची में बना हुआ है और उसका समर्थन करने वाले तुर्की को भी इसमें शामिल कर दिया गया है। दोनों ही देशों के आर्थिक हालात इस समय चिंताजनक बने हुए हैं।