हजारों करोड़ रुपये के घोटाले में वांछित भारत का भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी एक बार फिर सुर्खियों में है। डोमिनिका जेल में बंद चोकसी को लेकर नए-नए खुलासे हो रहे हैं। बीते दिनों उनकी कथित गर्लफ्रेंड बारबरा जेबरिका ने चौंकाने वाले खुलासे किए। वहीं एंटीगुआ सरकार ने भी कई दावे किए हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल उठता है कि वह किस मामले में भारत में वांछित है और वह घोटाले शामिल कैसे हुआ..आइए आपको इस बारे में विस्तार से समझाते हैं।
पंजाब नेशनल बैंक से करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोपी मेहुल चोकसी फिलहाल डोमिनिका की जेल में है। 23 मई को एंटीगुआ से डोमिनिका में अवैध प्रवेश करने को लेकर पकड़ा गया था। डोमिनिका सरकार ने उसे अवैध अप्रवासी घोषित किया है। डोमिनिका के राष्ट्रीय सुरक्षा और गृह मामलों के मंत्री रेबर्न ब्लैकमूर ने पुलिस प्रमुख को आदेश जारी किया है कि चोकसी को देश से बाहर करने के लिए कानून के मुताबिक जल्द से जल्द कदम उठाए जाएं। बता दें मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी के बाद मई के आखिरी हफ्ते में भारत की जांच एजेंसियां भी वहां पहुंची हैं।
नीरव मोदी से पहले चोकसी आएगा भारत
सीबीआई और ईडी के अधिकारियों की टीम उसके प्रत्यर्पण के लिए डोमिनिका सरकार और कोर्ट के सामने सबूत पेश करने के लिए वहां मौजूद है। हालांकि, इस ओर अभी तक कोई सफलता नहीं मिली। इधर मेहुल चोकसी के पास एंटीगुआ की नागरिकता है और उसे डोमिनिका ने पकड़ा है। एंटीगुआ सरकार उसकी करतूतों से इतनी परेशान है कि उसने डोमिनिका की सरकार से मेहुल चोकसी को भारत को सौंपने का अनुरोध किया है। अगर कोई कानूनी दांवपेंच नहीं फंसता तो नीरव मोदी से पहले मेहुल चोकसी भारत आ सकता है।
क्या है पीएनबी घोटाला
जनवरी 2018 में पंजाब नेशनल बैंक से 13,578 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। इसमें अरबपति हीरा काबोराबी नीरव मोदी और उसका भांजा मेहुल चोकसी इस मामले में अभियुक्त है। 30 जनवरी को सीबीआई ने पहली एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन उससे पहले ही इस घोटाले के दोनों मुख्य आरोपी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी भारत छोड़कर फरार हो गया। बाद में उसके रिश्तेदार भी भारत से भाग गए। तब से ही दोनों आरोपियों के प्रत्यर्पण की कोशिश की जा रही है। नीरव मोदी ब्रिटेन में है और वहां के गृह मंत्रालय ने उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है।
2011 में नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने पीएनबी बैंक से लिया था लोन
दरअसल, अरबपति डायमंड कारोबारी नीरव मोदी और उनके साथियों ने साल 2011 में बिना तराशे हुए हीरे आयात करने को लाइन ऑफ़ क्रेडिट के लिए पंजाब नेशनल बैंक की एक ब्रांच से संपर्क साधा। आम तौर पर बैंक विदेश से आयात को लेकर होने वाले भुगतान के लिए LoU यानी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी करता है, लेकिन पीएनबी बैंक के कुछ कर्मचारियों ने बैंक मैनेजमेंट को अंधेरे में रखकर कथित तौर पर नीरव मोदी की कंपनियों को फर्जी LoU जारी किया। इतना ही नहीं साजिश रचने वाले अधिकारियों ने सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन का गलत इस्तेमाल करते हुए नीरव और मेहुल चोकसी को फंड जारी करने की हरी झंडी दे दी।
2018 में घोटाले का हुआ था खुलासा
मामले का खुलासा सात साल बाद उस वक्त हुआ जब ये भ्रष्ट अधिकारी रिटायर्ड हो गए और नीरव मोदी की कंपनी ने जनवरी 2018 में दोबारा इसी तरह की सुविधा शुरू करने की गुज़ारिश की। नए अधिकारियों ने फर्जीवाड़े को पकड़ा और घोटाले की जांच से पर्दा हटाने के लिए जांच शुरू की। इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक ने जनवरी 2018 में पहली बार नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और उनके साथियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। सीबीआई ने नीरव मोदी, उनकी पत्नी, भाई, भांजा और कारोबारी साझेदार के खिलाफ मामले की जांच शुरू की, जिसमें आपराधिक साज़िश रचने का आरोप लगा।