अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज को लेकर चल रही खींचतान के बीच दस सीनेटरों ने एक बीच का रास्ता सुझाया है। ये सीनेटर दोनों पार्टियों के हैं। उन्होंने कहा है कि उन्होंने जो सुझाव दिए हैं, सिर्फ उन पर ही दोनों पार्टियों के बीच सहमति बन सकती है। मीडिया विश्लेषणों में कहा गया है कि सीनेटरों के ‘आम सहमत’ प्रस्ताव को मानने का मतलब राष्ट्रपति की महत्वाकांक्षी योजना को बेहद कमजोर कर देना होगा।
जानकारों ने ध्यान दिलाया है कि जिन दस सीनेटरों के समूह ने ये पहल की है, उनमें डेमोक्रेटिक पार्टी के दो ‘बागी’ सीनेटर भी शामिल हैं। ये दोनों पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे राष्ट्रपति के पैकेज से सहमत नहीं हैं। ये सीनेटर जो मेंचिन और क्रिस्टिन सिनेमा हैं। इसके अलावा इनमें मिट रोमनी जैसे रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख सीनेटर भी हैं। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्टों में अंदेशा जताया गया है कि इस कमजोर पैकेज पर भी बाकी रिपब्लिकन पार्टी को सहमत करना आसान नहीं होगा। इन रिपोर्टों में यह भी ध्यान दिलाया गया है कि ‘आम सहमत’ प्रस्ताव के साथ सिर्फ पांच रिपब्लिकन सीनेटरों ने अपना नाम जोड़ा है। अगर ये संख्या दस भी होती, तो पैकेज का पारित हो जाना निश्चित हो जाता।
‘आम सहमत’ प्रस्ताव में रिपब्लिकन पार्टी की इस दलील को स्वीकार कर लिया गया है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर का मतलब सिर्फ सड़क, पुल, बंदरगाह जैसी चीजें हैं। मानव विकास के पहलुओं को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता। इस तरह राष्ट्रपति के 2.3 ट्रिलियन डॉलर के पैकेज को घटा कर 974 अरब डॉलर का करने का सुझाव इन सीनेटरों ने दिया है। पैकेज के लिए धन जुटाने के लिए राष्ट्रपति बाइडन ने धनी लोगों और कॉरपोरेट सेक्टर पर टैक्स बढ़ाने का जो प्रस्ताव रखा है, उसे इस ‘आम सहमत’ प्रस्ताव में पूरी तरह ठुकरा दिया गया है।
सीनेटरों के समूह ने कहा है कि धन का कुछ हिस्सा पहले ही पारित हो चुके कोरोना राहत पैकेज से लिया जा सकता है। बाकी परियोजनाएं प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप के तहत अमल में लाई जा सकती हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अब तक बाइडन अपने पैकेज में इतनी बड़ी कटौती के लिए तैयार नहीं हुए हैं। लेकिन सीनेटरों के समूह ने मीडिया से कहा है कि राष्ट्रपति जानते हैं कि पैकेज को मंजूरी दिलाने का अकेला रास्ता इस फॉर्मूले पर सहमत होना ही है।
विश्लेषकों के मुताबिक अगर बाइडन इस मुद्दे पर समझौता करने को तैयार हुए, तो उससे डेमोक्रेटिक पार्टी में विवाद खड़ा हो सकता है। सीनेट की बजट समिति के अध्यक्ष बर्नी सैंडर्स और पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े से जुड़े नेता पहले से ये मांग करते रहे हैं कि राष्ट्रपति इस मामले में रिपब्लिकन पार्टी से बातचीत करना बंद करें। उनकी मांग रही है कि राष्ट्रपति फिलिबस्टर नियम को खत्म करने की पहल करें, जिसके बाद साधारण बहुमत से उनके पैकेज को मंजूरी मिल सकेगी। फिलिबस्टर नियम के तहत किसी प्रस्ताव को पास कराने के लिए 100 सदस्यीय सीनेट में 60 सदस्यों का समर्थन जरूरी हो जाता है।
जो बाइडन ने अमेरिकन जॉब्स प्लान नाम से इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज प्रस्तावित किया है। इसके अलावा उन्होंने फैमिली प्लान भी प्रस्तावित किया है। इन दोनों पैकेजों पर चार ट्रिलियन डॉलर का खर्च आएगा। सैंडर्स और उनके समर्थकों की यह भी मांग रही है कि इन दोनों पैकेजों को बजट रिकॉन्सिलिएशन नियम के तहत पारित कराया जाए, जिसके तहत साधारण बहुमत से प्रस्ताव पारित हो सकते हैँ। जबकि रिपब्लिकन पार्टी का दावा है कि इन दोनों पैकेज को बजट का हिस्सा नहीं कहा जा सकता, इसलिए यह नियम लागू करना गलत रास्ता होगा। बाइडन अब तक रिपब्लिकन पार्टी को नजरअंदाज कर आगे बढ़ने से हिचकते रहे हैं।