ब्रिटिश अखबार द गार्जियन के मुताबिक हाउगेन ने 2019 में फेसबुक में काम करना शुरू किया था। उसके पहले वे पिनट्रेस्ट और गूगल जैसी कंपनियों में दस साल काम कर चुकी थीं। हाउगेन ने दावा किया है कि टेक इंडस्ट्री में अपने लंबे अनुभव के बाद उन्होंने फेसबुक से जुड़ने का फैसला इसलिए किया, ताकि दुष्प्रचार रोकने में वे कंपनी की मदद कर सकें। उन्होंने कहा कि वे अतीत में दुष्प्रचार का निजी रूप से शिकार बन चुकी हैं। उनका अपने एक दोस्त से संबंध इसलिए टूट गया, क्योंकि वे दोनों एक ऑनलाइन षडयंत्र का शिकार बन गए।
हाउगेन के मुताबिक फेसबुक में काम करते हुए वे महसूस करने लगीं कि ये कंपनी इन मुद्दों को हल करने में अनिच्छुक है, जबकि ऐसा करने के उपकरण उसके पास मौजूद हैं। हालांकि उनकी राय है कि मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक को किसी दुर्भावना के कारण नहीं बनाया था। उनकी ये इच्छा नहीं थी कि वे नफरत फैलाने वाला कोई मंच बनाएं। लेकिन बाद में कंपनी ने जो रास्ता चुना, उसके गंभीर परिणाम हो रहे हैं। मीडिया में दिए गए इन बयानों के बाद हाउगेन को अमेरिकी कांग्रेस (संसद) ने पूछताछ के लिए बुलाया है।
बीते हफ्ते कांग्रेस के सदस्यों ने फेसबुक के वैश्विक सुरक्षा प्रमुख एंटिगोन डेविस से पूछताछ की थी। उधर कंपनी के उपाध्यक्ष निक क्लेग ने कहा है कि सोशल मीडिया का आज के समाज पर बड़ा असर है। उन्होंने फेसबुक कर्मचारियों को भेजे एक मेल में कहा कि इस बारे में जब कभी चर्चा होती है, तो फेसबुक का नाम उसमें आता है। लेकिन जो भी साक्ष्य मौजूद हैं, उनसे इस आरोप की पुष्टि नहीं होती कि फेसबुक या कुल मिला कर सोशल मीडिया समाज में ध्रुवीकरण का प्रमुख कारण है।