तालिबान के सत्ता पर काबिज होने के बाद अफगानिस्तान में अराजकता के हालात हैं। काबुल एयरपोर्ट पर भी भारी अव्यवस्था फैली हुई है। जैसे तैसे विभिन्न देश अपने नागरिकों को वहां से निकाल रहे हैं। ऐसे माहौल में विश्व व्यापी कोरोना महामारी को तो भुला दिया गया है। कोरोना व अन्य बीमारियों की दवाएं तक काबुल नहीं पहुंच पा रही हैं। इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चिंता जताई है।
डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता तारिक जसारविक ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि काबुल एयरपोर्ट पर मची अफरातफरी का दवाओं की आपात आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है। अफगानिस्तान के पहले से कमजोर हो चुके स्वास्थ्य तंत्र की हालत और खस्ता हो गई है।
टीकाकरण पर भी असर, संक्रमण बढ़ने का खतरा
डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता ने कहा कि दवाओं व कोविड वैक्सीन की आपूर्ति थमने से अफगानिस्तान में कोरोना टीकाकरण पर भी व्यापक असर पड़ा है। स्वास्थ्य केंद्रों पर विस्थापितों की भीड़ लग रही है। इससे वहां कोरोना की रोकथाम के उपायों पर भी गंभीर असर हो रहा है। ऐसे में कोरोना संक्रमण और बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
विश्व के दो पोलियोग्रस्त देशों में एक अफगानिस्तान
डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता ने कहा कि अफगानिस्तान विश्व के दो पोलियोग्रस्त देशों में से एक है। ऐसे में पोलियो वैक्सीन की आपूर्ति में बाधा से पोलियो मुक्ति अभियान पर भी गंभीर असर पड़ेगा। इससे अफगानी बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ेगा।
ब्रिटिश पीएम व जर्मन चांसलर वैश्विक सहयोग के पक्ष में
ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन व जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल अफगानिस्तान के मामले में वैश्विक सहयोग के पक्ष में हैं। दोनों नेताओं ने मंगलवार को फोन पर चर्चा में यह बात कही। उन्होंने कहा कि सबसे पहले वहां से विदेशी नागरिकों को निकालने के लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है। इसके अलावा वहां व समूचे क्षेत्र में मानवीय त्रासदी रोकने के दीर्घावधि उपाय किए जाना चाहिए।