लेकिन ताजा अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा संख्या में रूसी 2016 से 2019 के बीच देश से बाहर गए। इस बीच तीन लाख लोग विदेश जाकर बसे। टाकी टेला ने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के आधार पर बताया है कि फिलहाल एक करोड़ से अधिक रूसी विदेशों में रह रहे हैं। इससे ज्यादा बड़ी संख्या में सिर्फ भारत और मेक्सिको के लोग विदेशों में हैं।
विश्लेषकों ने कहा है कि इस समय रूस सरकार देश की आबादी बढ़ाने की नीति पर चल रही है। इसके लिए दंपतियों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। रूस में जनसंख्या रिप्लेसमेंट दर 1990 के दशक में ही उस सीमा से नीचे चली गई थी, जिसके बाद असल में आबादी घटने लगती है। जब रूस इस चुनौती का सामना कर रहा है, वैसे मौके पर बड़ी संख्या में रूसियों का विदेश जाकर बसना सरकार के लिए चिंता का विषय है।
इस साल अप्रैल में राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था- ‘रूसी लोगों को अपने देश में बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।’ लेकिन थिंक टैंक लेवाडा के एक सर्वे से कुछ समय पहले ये सामने आया था कि कोरोना महामारी से बढ़ी दिक्कतों के बीच अब रिकॉर्ड संख्या में रूसी विदेश जाकर बसने की इच्छा जता रहे हैं। सर्वे के मुताबिक अब रूस के 20 फीसदी नागरिक ऐसी इच्छा रखते हैं।