अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन
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अफगानिस्तान से अपने सैनिकों की वापसी के फैसले का बचाव करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और उनके प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया है कि अफगान सेना के ढहने से पहले कितने लोगों ने इसमें अपनी सेवाएं दी हैं। बीते सोमवार को बाइडन ने एक व्हाइट हाउस संबोधन में कहा था, 'हमने अरबों रुपये खर्च किए। हमने करीब तीन लाख क्षमता वाली अफगान सैन्य बल को प्रशिक्षित किया और हथियार मुहैया कराए। यह हमारे कई नाटो सहयोगियों की सेना से बड़ा था। हमने उन्हें हर वह चीज दी जिसकी उन्हें जरूरत पड़ सकती थी।'
इस तीन लाख के आंकड़े का उल्लेख बाइडन पहले भी अपने भाषणों में कर चुके हैं। विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भी रविवार को सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में इस आंकड़े का उल्लेख किया था। तीन लाख का आंकड़ा बाइडन प्रशासन ने तैयार नहीं किया है। अमेरिकी सेना, कई थिंक टैंक और मीडिया संस्थान लंबे समय से इसी या इससे मिलते-जुलते आंकड़े का इस्तेमाल करते रहे हैं। हालांकि, यह आंकड़ा कभी विश्वसनीय नहीं माना गया। सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञों कहते हैं कि कई कारणों से यह आंकड़ा सही नहीं माना जा सकता।
अफगानिस्तानी बलों के आकार का सही आंकड़ा उपलब्ध न हो पाने के पीछे की एक बड़ी वजह कथित 'घोस्ट फाइटर्स' रहे। ये ऐसे काल्पनिक सैनिक या पुलिस अधिकारी थे जिन्हें केवल इसलिए नियुक्त किया गया था जिससे भ्रष्ट लोग उसका वेतन पा सकें। यहां तक कि बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन व्यवस्था लाने के बाद भी यह नहीं पता लगाया जा सका कि कितने लोग रोज ड्यूटी पर आ रहे हैं और कितने नहीं। ऐसे में माना जा सकता है कि अफगानिस्तान के सैन्य बलों के अंदर नियुक्ति में ही हो रहे भ्रष्टाचार ने इस आंकड़े को काफी अधिक कर दिया है।
अमेरिकी सरकार के वॉचडॉग ने जुलाई की अपनी एक रिपोर्ट में तीन लाख के आंकड़े (तीन लाख 699) का इस्तेमाल यह कहते हुए कहा था कि ये आंकड़े अमेरिकी नेतृत्व वाली संयुक्त सुरक्षा हस्तांतरण कमांड की ओर से उपलब्ध कराए गए थे। हालांकि, इसी रिपोर्ट में घोस्ट फाइटर्स और इसके चलते अफगानिस्तान की सैन्य बलों में पनपे भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर गंभीर चिंता भी व्यक्त की गई थी। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में एक अन्य अनुमान में यह माना जाता है कि अफगानिस्तान के सैन्य बलों में सैनिकों की संख्या डेढ़ से दो लाख के बीच हो सकती है।