ब्रिटेन सरकार चरमपंथी गतिविधियों को रोकने के लिए योजना पर काम कर रही है। योजना के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इंडोनेशिया जैसे देशों के नफरत फैलाने वाले इस्लामी प्रचारकों को देश में प्रवेश करने से रोक दिया जाएगा। एक प्रमुख अखबार की खबर में रविवार को यह जानकारी दी गई।
'डेली टेलीग्राफ' की खबर के मुताबिक, ब्रिटेन की सरकार चरमपंथी गतिविधियों में भारी वृद्धि को लेकर चिंतित है। सरकार अन्य देशों के सबसे खतरनाक चरमपंथियों की पहचान करने के लिए अधिकारियों को नियुक्त कर रही है। ताकि उन्हें 'वीजा चेतावनी सूची' (वीजा वार्निंग लिस्ट) में शामिल किया जा सके।
नई योजना के तहत उन लोगों को ब्रिटेन में प्रवेश करने से मना कर दिया जाएगा, जिनका नाम इस सूची में शामिल होगा। खबर में यह खुलासा तब किया गया है, जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने डाउनिंग स्ट्रीट से चेतावनी दी है कि उनके देश के लोकतांत्रिक और बहु-धार्मिक मूल्यों को चरमपंथियों से खतरा है। सुनक ने हाल ही में अपने भाषण में कहा था, हम इस देश में उन लोगों के प्रवेश को रोकने का पूरा प्रयास करेंगे, जिनका मकसद देश के मूल्यों को कमजोर करना है।
सुनक ने कहा, गृह मंत्री ने यहां वीजा पर रहने वाले लोगों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगर वे प्रदर्शनों के दौरान नफरत फैलाना चाहते हैं या लोगों को धमकाना चाहते हैं तो हम उनके यहां रहने का अधिकार छीन लेंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री इस्राइल-हमास युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतर रहे लोगों को यह चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था, अब समय आ गया है कि हम सभी बांटने वाली ताकतों का मुकाबला करने एकजुट हों। हमें उन चरमपंथियों का सामना करना होगा, जो हमें बांटना चाहते हैं। उन्होंने देश को आगाह किया था कि इस्लामी चरमपंथी और धुर दक्षिणपंथी एक दूसरे का हौंसला बढ़ाएंगे।
फलस्तीन के समर्थन में शनिवार को हजारों लोग लंदन की सड़कों पर उतर आए। इस दौरान मेट्रोपोलिटन पुलिस ने शांति भंग करने के आरोप में 12 लोगों की गिरफ्तारी की।