यूनिवर्सिटी ऑफ डेनमार्क में जन स्वास्थ्य विज्ञान की प्रोफेसर लोन सिमॉनसेन के मुताबिक इन्फ्लूएंजा की सबसे लंबी समय तक चली लहर पांच वर्ष जारी रही थी। उसके बाद हर दो या तीन साल पर उसकी लहर आती रही है। कोविड-19 अब दो वर्ष पूरा कर अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश करने वाला है और अभी इसका कोई अंत नजर नहीं आता। इससे अब तक दुनिया में 46 लाख लोग मर चुके हैं। 1918 में आई स्पेनिश फ्लू महामारी के बाद इतने लोग किसी महामारी से नहीं मरे।
अभी हाल यह है कि अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और इजराइल जैसे देशों में भी कोरोना संक्रमण की लहरें आ रही हैं, जबकि वहां टीकाकरण की दर काफी ऊंची है। टीके का यह असर हुआ है कि बाद में आई लहरें पहली लहर जितनी घातक साबित नहीं हुईं। लेकिन चिंता की बात यह है कि नौजवानों और नाबालिक बच्चों को ये संक्रमण लगने लगा है, जिनका अभी टीकाकरण नहीं हुआ है।
मलेशिया, मेक्सिको, ईरान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में टीकाकरण की दर कम है। वहां कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट ने ज्यादा कहर ढाया है। जानकारों के मुताबिक पिछले साल जब कोरोना महामारी आई, तब उम्मीद थी कि टीका बनते ही इस महामारी पर उसी तरह काबू पा लिया जाएगा, जैसा पोलियो पर पाया गया था। लेकिन ये उम्मीद अब टूट चुकी है। इसका साफ संकेत यह है कि कोरोना वायरस संक्रमण से निकट भविष्य में मुक्ति नहीं मिलने वाली है।