ईयू ने ताइवान जैसे उन सहभागी देशों के साथ व्यापार और निवेश संबंध आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है, जिनके साथ उसके व्यापार और निवेश संबंधी समझौते नहीं हैं। लेकिन इसमें ताइवान के साथ द्विपक्षीय निवेश समझौता करने जैसी बात सीधे तौर पर नहीं कही गई है। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने बीते मई में ईयू के साथ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौता करने की इच्छा जताई थी।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक ईयू इस बात के प्रति सतर्क है कि वैसा समझौता चीन को रास नहीं आएगा। हाल में ईयू के सदस्य देश लिथुआनिया ने अपनी राजधानी विलनियस में ‘ताइवान के प्रतिनिधि’ का दफ्तर खोला था। उससे नाराज चीन ने लिथुआनिया ने राजनयिक संबंध तोड़ लिए थे।
दस्तावेज में चार देशों के समूह क्वैड के साथ मिल कर काम करने की इच्छा जताई गई है। क्वैड में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैँ। क्वैड एक सुरक्षा समूह है। दस्तावेज में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन, टेक्नोलॉजी और वैक्सीन जैसे साझा हित के मसलों पर वह क्वैड के साथ सहयोग करना चाहता है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक ईयू के दस्तावेज का मूल स्वर चीन के खिलाफ है। लेकिन इसमें ये बात करते समय सावधानी बरती गई है। ईयू सीधे चीन से टकराव लेने के पक्ष में नहीं दिखता। बल्कि वह इस मामले में परोक्ष नीति अपनाना चाहता है।