अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद अब एक बड़ी चिंता यह है कि क्या अफगानिस्तान फिर से ड्रग्स (नशीली दवाओं) की तस्करी का केंद्र बनेगा। यूरोपीय जानकारों का कहना है कि तालिबान के लिए ड्रग्स के कारोबार पर काबू पाना आसान नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि अफगानिस्तान के कई प्रांतों में अफीम की खेती ही बहुत से लोगों की आमदनी का एकमात्र जरिया है। इसके अलावा अपने पिछले शासनकाल के शुरुआती वर्षों में तालिबान ने ड्रग्स को अपनी आय का स्रोत भी बना रखा था। हालांकि अपने शासन के आखिरी दो वर्षों में उसने अफीम की खेती को रोकने की कोशिश की थी।
संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक 2020 में अफगान किसानों ने 2,300 टन अफीम की खेती की। दुनिया में अफीम के गैर-कानूनी कारोबार में अफगानिस्तान में पैदा होने वाले अफीम का हिस्सा 90 फीसदी से भी ज्यादा बना रहा है। ब्रिटेन में आने वाली 95 फीसदी अफीम अवैध ढंग से अफगानिस्तान से आती है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक हाल में अफगानिस्तान में अफीम की खेती में बढ़ोतरी देखने को मिली है।
जानकारों का कहना है कि अगर तालिबान अफीम की खेती पर काबू पाना चाहे, तब भी उसके लिए ये मुश्किल चुनौती होगी। उस हाल में जिन किसानों की आमदनी का यह मुख्य स्रोत है, उनकी बगावत का उसे सामना करना पड़ेगा। लंदन यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज में प्रोफेसर जोनाथन गुडहैंड ने वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू से कहा कि तालिबान के पिछले शासनकाल के दौरान अफीम की खेती पर कार्रवाई करने की तालिबान की कोशिश से किसानों के लिए मुश्किल खड़ी हुई थी।
इस बार सत्ता पर कब्जे के बाद तालिबान ने कहा है कि वह अफगानिस्तान को अफीम की खेती का केंद्र नहीं रहने देगा। काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस मे तालिबान के प्रवक्ता जुबिहुल्लाह मुजाहिद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की थी कि वह अफीम की खेती रोकने में तालिबान की मदद करे। जानकारों का कहना है कि अभी तालिबान अफीम से होने वाली आय पर निर्भर नहीं है। हालांकि उससे होने वाली आय का वह इस्तेमाल जरूर करता रहा है। अब चूंकि पश्चिमी देशों ने अफगानिस्तान के लिए अपनी सहायता रोक दी है, इसलिए ये आशंका बढ़ी है कि तालिबान की अफीम के कारोबार पर निर्भरता बढ़ सकती है।
प्रोफेसर जोनाथन गुडहैंड की राय है कि इस वक्त अफीम की खेती रोकना किसी की प्राथमिकता नहीं है। इसलिए इसमें बढ़ोतरी जारी रहेगी। इससे यूरोप में अफीम से बनने वाले मादक पदार्थ हेरोइन की आपूर्ति बढ़ सकती है। उससे लोगों को सस्ते में हेरोइन उपलब्ध हो सकता है। ब्रिटेन के पूर्व मंत्री जेरमी हंट ने कहा है कि अफगानिस्तान से फौज वापसी के विनाशकारी फैसले के जो बुरे परिणाम संभावित हैं, उनमें एक पूरी दुनिया में हेरोइन की आपूर्ति में बढ़ोतरी भी है।
ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी के मुताबिक अफगानिस्तान में पहले से ही अफीम की खेती बढ़ रही थी। अब पश्चिमी सेनाओं की वापसी से देश में पैदा हुई अस्थिरता का असर इसकी पैदावार पर पड़ सकता है। इसलिए अब जरूरी है कि सभी देश मिल कर ड्रग्स कारोबार और उससे जुड़े गंभीर अपराधों का मुकाबला करने की रणनीति बनाएं।