ड्यूमा के 450 सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान शुरू हुआ है। इनमें आधी सीटें निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्यक्ष मतदान से भरी जाएंगी। बाकी आधी सीटें पार्टियों को मिले मत प्रतिशत के आधार पर आनुपातिक रूप से भरी जाएंगी। नवालनी ने कहा है कि उनकी पार्टी इस चुनाव में ‘स्मार्ट वोटिंग’ रणनीति पर चल रही है। इसका मकसद यूनाइटेड रशिया पार्टी को हर हाल में हराना है। इस रणनीति के मुताबिक यूनाइटेड रशिया के विरोधी मतदाताओं से कहा गया है कि अपने चुनाव क्षेत्र में वे उस विपक्षी उम्मीदवार को वोट दें, जिसे जीतने की संभावना ज्यादा हो।
रूस सरकार के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि स्मार्ट रणनीति विदेशी इशारे पर बनाई गई है। कुछ रोज पहले मास्को स्थित अमेरिकी राजदूत को रूसी विदेश मंत्रालय में बुलाया गया। उसमें उनसे पूछा गया कि अमेरिकी टेक कंपनियां रूस में कोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं कर रही हैं। पर्यवेक्षकों के मुताबिक रूस सरकार ने इसके जरिए ये धारणा बनाने की कोशिश की है कि पश्चिमी देश अपनी टेक कंपनियों के जरिए रूसी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
अलेक्सी नवालनी ने जिन उम्मीदवारों को समर्थन देने की अपील मतदाताओं से की है, उनमें 137 कम्युनिस्ट पार्टी के हैँ। नवालनी की लिस्ट में 48 उम्मीदवार वामपंथी जस्ट रशिया पार्टी, 20 धुर दक्षिणपंथी एलडीपीआर, 10 उदारवादी याबलोको पार्टी, पांच उदारवादी न्यू पीपुल्स पार्टी और एक पूंजीवाद समर्थक पार्टी ऑफ ग्रोथ का है।
वेबसाइट रशियाटुडे.कॉम पर छपे एक विश्लेषण में कहा गया है कि विपक्ष की स्मार्ट रणनीति का का यह मतलब हो सकता है कि अगले हफ्ते रूसी संसद में कम्युनिस्ट पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में नजर आए। विश्लेषकों के मुताबिक ऐसा हुआ तो रूस का पश्चिम विरोधी रुख और मजबूत होगा। उनके मुताबिक ये विडंबना ही है कि पश्चिमी देशों में लोकप्रिय नवालनी ने पुतिन को कमजोर करने के लिए वह रास्ता चुनाव है, जिससे रूस का पश्चिम विरोधी रुख और सख्त हो सकता है।