तंत्रिका विज्ञान में पारंपरिक रूप से माना जाता रहा है कि मस्तिष्क को बाहरी संकेत मिलने पर ही डोपामिन के स्तर में बदलाव आता है। लेकिन अब एक ताजा शोध में पता चला है कि आंतरिक परिवर्तन लाकर भी मस्तिष्क में डोपामिन बढ़ाया जा सकता है।
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी सेन डिएगो के शोधकर्ता डेविड क्लीनफेल्ड ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर चूहों को स्वेच्छा से डोपामिन के आकार और आवृत्ति बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित करने में सफलता हासिल की है।
चूहों के मस्तिष्क से मापा डोपामिन का स्तर
क्लीनफेल्ड और उनके साथियों ने चूहों के मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों में एक समय में डोपामिन का स्तर मापने वाली विधि ईजाद की थी। इसमें चूहों के मस्तिष्क में बिना किसी स्पष्ट कारण के तंत्रिका कोशिकाओं से (न्यूरॉन) डोपामिन का बड़ा प्रस्फुटन होता है, जिन्हें आवेग कहा जाता है। यह हरेक मिनट में एक बार होता है।
1990 के सिद्धांत से उलट नतीजा
1990 के दशक में तंत्रिका विज्ञानी वूल्फ्रम शूल्ज ने खोजा था कि मस्तिष्क तभी डोपामिन छोड़ता है, जब इनाम की उम्मीद होती है न कि इनाम मिल जाने पर। ताजा शोध में इस विचार को चुनौती मिली है।