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शोध में दावा: किशोरों का सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताने से नहीं पड़ता नकारात्मक असर

Sat, 04 Sep 2021 07:52 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, कैलिफोर्निया।

सार

  • स्क्रीन टाइम घटाने के बजाय सकारात्मक कंटेंट को बढ़ावा देने पर हो जोर
  • ऑनलाइन रहने वाले बच्चे नहीं होते अकेलेपन का शिकार
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सांकेतिक तस्वीर.... - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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बच्चों (किशोर) पर लंबा समय बिताने के मुकाबले स्क्रीन टाइम की गुणवत्ता का ज्यादा असर पड़ता है। इसका खुलासा यूसी बर्कले के नए शोध में हुआ है।

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इसमें कहा गया है कि बच्चे और युवा अगर इंस्टाग्राम, टिकटॉक, स्नैपचैट एवं अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्क्रॉल और पोस्ट करते हैं तो इससे ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। वे ऑनलाइन कितने घंटे बिताते हैं, यह उतनी बड़ी समस्या है। सबसे बड़ी मुश्किल उनके ऑनलाइन कंटेंट देखने और चैट की गुणवत्ता को लेकर है।

‘जर्नल ऑफ रिसर्च ऑन एडोलसेंस’ में प्रकाशित शोध के मुताबिक, जो बच्चे या युवा व्हाट्सएप के जरिये दोस्तों और रिश्तेदारों से चैट करते हैं या मल्टीप्लेयर ऑनलाइन वीडियो गेम खेलते हैं, उन्हें अकेलेपन की कम शिकायत रहती है।
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शोध के प्रमुख लेखक एवं यूसी बर्कले इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट में विकास वैज्ञानिक डॉ. लूसिया मैगिस-वेनबर्ग ने कहा, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आप स्क्रीन पर अपना समय कैसे बिताते हैं न कि कितना समय व्यतीत करते हैं।

इससे यह भी पता चलता है कि आप अकेलापन महसूस करते हैं या नहीं। इसलिए शिक्षकों और माता-पिता को स्क्रीन टाइम घटाने के बजाय सकारात्मक ऑनलाइन कंटेंट को बढ़ावा देने पर जोर देना चाहिए। 
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आम धारणा को चुनौती देता शोध
डॉ. लूसिया का कहना है, शोध उस आम धारणा को चुनौती देते हैं कि सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चे अकेलेपन के शिकार हो जाते हैं। ऑनलाइन कंटेंट या चैट का सकारात्मक इस्तेमाल किया जाए तो अकेलापन दूर होता है। विशेष रूप से यह तब जब बच्चों के पास कोई अन्य विकल्प न हो। यह अध्ययन अप्रैल, 2020 में 11 से 17 साल के छात्रों पर यह समझने के लिए किया गया था कि सामाजिक रूप से अलग-थलग परिस्थितियों में उनका ऑनलाइन व्यवहार और संबंध कैसा रहता है।

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