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India-Nepal: नेपाली संसद में बोले पीएम प्रचंड- भारत दौरे पर द्विपक्षीय संबंधों और सीमा के मुद्दों पर हुई चर्चा

Thu, 20 Jun 2024 10:29 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

India-Nepal: नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने नेपाल की संसद को बताया कि, उनके भारत दौरे के दौरान भारत के साथ देश के द्विपक्षीय संबंध, पुराने समझौतों को लागू करने और सीमा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई है। पीएम प्रचंड 9 जून को भारत के दौरे पर थे।
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नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' - फोटो : ANI
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विस्तार
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9 जून को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण समारोह में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए थे। इसमें पड़ोसी देश नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने भी शिरकत की थी। वहीं अपने भारत दौरे को लेकर देश की संसद को जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री 'प्रचंड' ने संसद को बताया कि, उनके भारत दौरे के दौरान भारत के साथ देश के द्विपक्षीय संबंध, पुराने समझौतों को लागू करने और सीमा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई है।
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'कृषि क्षेत्र में सहयोग पर गंभीर चर्चा हुई'
प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने बताया कहा कि उनके दौरे के दौरान, पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना, अरुण जलविद्युत परियोजना के कार्यान्वयन और कृषि क्षेत्र में सहयोग के बारे में गंभीर चर्चा हुई है। बता दें कि प्रधानमंत्री प्रचंड ने अपनी सरकार के हाल ही में 11 देशों के राजदूतों को वापस बुलाने के फैसले का भी बचाव किया, जिसमें भारत और अमेरिका में नेपाली कांग्रेस के कोटे के तहत नियुक्त उसके राजदूत भी शामिल हैं, जबकि तीन महीने पहले उन्होंने पार्टी से अपना गठबंधन समाप्त कर लिया था और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से हाथ मिला लिया था।

'संवैधानिक प्रावधान के आधार पर बुलाए राजदूत'
वहीं सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री प्रचंड ने कहा कि संवैधानिक प्रावधान के अनुसार राजदूतों को वापस बुलाया गया था और सरकार देश के हित और कूटनीति को मजबूत करने के लिए निष्पक्ष आधार पर राजदूतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने की नीति को अपनाने के बारे में गंभीर थी। दरअसल इस महीने की शुरुआत में, प्रधानमंत्री प्रचंड की भारत की आधिकारिक यात्रा से ठीक पहले, नेपाल सरकार ने भारत में नेपाली राजदूत शंकर शर्मा समेत 11 राजदूतों को वापस बुला लिया था। जिसकी विपक्ष और मीडिया ने जमकर आलोचना की थी। 
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'कार्यकाल पूरा होने से पहले बुलाए जा सकते हैं राजदूत'
इस फैसले पर प्रधानमंत्री प्रचंड ने कहा, सरकार राष्ट्र के सर्वोत्तम हित में राजनयिक मिशनों और दूतों को संगठित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, राजदूत नियुक्ति निर्देश, 2015 के अनुसार, अगर आवश्यक समझा जाए तो राजदूतों को उनके कार्यकाल पूरा होने से पहले भी वापस बुलाया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल राजनीतिक कोटे के तहत राजदूत नियुक्त किए गए लोगों को ही गठबंधन में बदलाव के तुरंत बाद वापस बुलाया जाता है। 

इन देशों से नेपाल ने वापस बुलाए अपने राजदूत
नेपाल सरकार ने दिन देशों से अपने राजदूत वापस बुलाए हैं। उनमें शंकर शर्मा (भारत), श्रीधर खत्री (अमेरिका), ज्ञान चंद्र आचार्य (यूनाइटेड किंगडम) और ज्योति पयाकुरल भंडारी (दक्षिण कोरिया) शामिल हैं। इन्हें नेपाली कांग्रेस को आवंटित कोटे में नियुक्त किया गया था, जब पार्टी अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा ने 2021 में सरकार का नेतृत्व किया था। वहीं अन्य राजदूत जिनके कार्यकाल में कटौती की गई है, उसमें नरेश बिक्रम ढकाल (कतर), नवराज सुबेदी (सऊदी अरब), शर्मिला परजुली ढकाल (स्पेन), राम स्वार्थ रे यादव (डेनमार्क), कांता रिजाल (इस्राइल), दिलीराज पौडेल (मलेशिया) और सालिन नेपाल (पुर्तगाल) शामिल हैं।
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