चीन ने तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है। चीन ने कहा कि दलाई लामा बातचीत के लिए अपने राजनीतिक प्रस्तावों में सुधार करें। इसके साथ चीन ने अमेरिका को सुझाव देते हुए कहा कि अमेरिका तिब्बत से जुड़े मुद्दों को लेकर संवेदनशीलता का सम्मान करें। बता दें कि वाशिंगटन एक सख्त तिब्बत नीति कानून पारित करने वाला है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दलाई लामा के साथ केंद्र सरकार के संपर्क और संवाद के बारे में चीन की नीति अविरोधी और पूरी तरह से स्पष्ट है।
अमेरिका ने तिब्बत को लेकर पास किया बिल
अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की धर्मशाला यात्रा और तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के साथ उनकी बैठक पर चीन ने नजर रखी। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की ये यात्रा ऐसे समय में हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों की तरफ से पारित तिब्बत नीति विधेयक पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। बता दें कि राष्ट्रपति जो बाइडन के हस्ताक्षर के बाद ये विधेयक कानून बन जाएगा। तिब्बत नीति विधेयक तिब्बत पर अपने नियंत्रण के बारे में चीन के विमर्श का मुकाबला करने और चीनी सरकार और दलाई लामा के बीच संवाद को बढ़ावा देने पर जोर देता है। जो साल 1959 में हिमालयी क्षेत्र से भागने के बाद से भारत में रहते हैं।
अमेरिका को चीन ने दिया सुझाव
वहीं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के धर्मशाला दौरे और तिब्बती धर्मगुरु के साथ मुलाकात पर चीन ने कहा, हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वो शिजांग से जुड़े मुद्दों की संवेदनशीलता और महत्व को स्पष्ट रूप से देखे। शिजांग पर अपनी टिप्पणियों में चीन के मूल हितों का ईमानदारी से सम्मान करें। उन्होंने निर्वासित तिब्बत सरकार की कथित टिप्पणियों की भी आलोचना की कि वह अमेरिकी संसद द्वारा पारित नए तिब्बत कानून का उपयोग चीन को बातचीत की मेज पर आने के लिए बाध्य करने और अन्य देशों के साथ बातचीत के लिए दबाव डालने का आग्रह करने के लिए करेगी।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने आगे कहा कि, तथाकथित निर्वासित तिब्बत सरकार पूरी तरह से अलगाववादी राजनीतिक समूह और अवैध संगठन है जो चीन के संविधान और कानूनों का पूरी तरह से उल्लंघन करता है। इसे किसी भी देश ने मान्यता नहीं दी है।