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साइबर हमला: दुनियाभर की हजारों कंपनियां प्रभावित, हैकरों ने मांगे बिटकॉइन में सात करोड़ डॉलर

Tue, 06 Jul 2021 06:44 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक बड़े साइबर हमले की वजह से मंगलवार को स्वीडन की सैकड़ों सुपरमार्केट बंद रहीं। यह साइबर हमला पिछले चार दिनों से दुनियाभर की सैकड़ों कंपनियों को प्रभावित कर चुका है। जानकारी के अनुसार हैकर इसे बंद करने के लिए बिटकॉइन में 70 मिलियन (सात करोड़) अमेरिकी डॉलर की मांग कर रहे हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
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मायामी की आईटी कंपनी कासेया पर शुक्रवार को साइबर हमला हुआ था। कंपनी ने सोमवार को कहा था कि शुक्रवार से अब तक 1500 बिजनेस पर असर पड़ चुका है। इस हमले के पीछे रूसी हैकरों का हाथ बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अब तक का सबसे बड़ा 'रैनसमवेयर' हमला हो सकता है। बता दें कि रैनसमवेयर डिजिटल ब्लैकमेलिंग होती है, जिसमें हैकर किसी का डाटा चुरा कर उसे इन्क्रिप्ट कर देते हैं, जिससे उस डाटा का उपयोग न किया जा सके। इसके बाद वह पीड़ित से पैसे की मांग करते हैं।

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कासेया साइबर हमले की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। इसकी वजह से कम से कम 17 देशों में फार्मा कंपनियों से लेकर गैस स्टेशन तक के व्यापार प्रभावित हुए हैं। वहीं, न्यूजीलैंड के दर्जनों किंडरगार्टेन पर भी इसका असर देखने को मिला है। स्वीडन की अधिकतर 800 कूप सुपरमार्केट के कैश रजिस्टर पर साइबर हमले का असर पड़ा है। जिसके चलते लगातार तीसरे दिन ये सुपरमार्केट बंद रहे। हालांकि, कूप के प्रेस अधिकारी ने उम्मीद जताई है कि दिन खत्म होने तक खुले सुपरमार्केट की संख्या बंद से ज्यादा होगी।

बता दें कि जबकि कासेया इतनी अधिक प्रसिद्ध कंपनी नहीं है, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक अच्छा निशाना थी क्योंकि इसके सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हजारों कंपनियां करती हैं। इस कंपनी को निशाना बनाकर हैकरों को एक ही बार में बड़ी संख्या में व्यापारों को प्रभावित करने की अनुमति मिल गई। बता दें कि कासेया पूरी दुनिया में करीब 40 हजार कंपनियों को आईटी सेवाएं प्रदान करती है। इनमें से कुछ कंपनियां इसके बदले में कुछ अन्य व्यापारों के कंप्यूटर सिस्टम मैनेज करने का काम करती हैं। 
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कासेया ने सोमवार को कहा था कि सीधे तौर पर इसके 60 से कम ग्राहक प्रभावित हुए हैं। वहीं, इसने अनुमान लगाया कि करीब 1500 डाउनस्ट्रीम बिजनेस इससे प्रभावित हुए हैं। कंपनी ने कहा था कि वह एक सॉफ्टपेयर अपडेट रिलीज करके अपने सर्वर वापस लाने की कोशिश कर रही है। माना जा रहा है कि रूस का 'रीविल' नामक एक हैकरों का समूह इस रैनसमवेयर साइबर हमले के पीछे है। हैकरों ने चुराए गए डाटा को रीस्टोर करने के लिए एक ऑनलाइन टूल के बदले बिटकॉइन में 70 मिलियन डॉलर की मांग की है।

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