अफ्रीकी देश गिनी में हुए सैनिक तख्ता पलट चीन के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। इसकी वजह बॉक्साइट की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी है। गिनी में ही बॉक्साइट के सबसे बड़ा भंडार है। वहां की घटनाओं के बाद इस खनिज के अंतरराष्ट्रीय भाव में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। इससे चीन को बड़ा झटका लगेगा।
जानकारों का कहना है कि इस घटनाक्रम का चीन जितना बुरा असर किसी और देश पर नहीं होगा। इसकी वजह यह यह है कि चीन ऐल्यूमिनियम का सबसे बड़ा उत्पादक है। ऐल्यूमिनियम बनाने के लिए जरूरी सामग्री बॉक्साइट से ही निकाली जाती है।
गिनी में बीते रविवार को सेना ने राष्ट्रपति को हटा कर सत्ता खुद संभाल ली। इससे वहां राजनीतिक अस्थिरता की हालत बन गई है। उसका तुरंत असर बॉक्साइट की कीमत पर देखा गया। जानकारों का कहना है कि अगर गिनी में तुरंत राजनीतिक स्थिरता नहीं लौटी, तो चीन की ऑस्ट्रेलिया पर निर्भरता बढ़ जाएगी। ऑस्ट्रेलिया के साथ चीन के संबंध बीते कुछ समय से बेहद तनावपूर्ण हैं। ऑस्ट्रेलिया की कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच की मांग से चीन भड़क उठा था। उसके बाद उसने खुद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ व्यापार युद्ध शुरू कर दिया। अब उसका वह रुख उसे भारी पड़ सकता है।
चीन की चिंता गिनी की घटनाओं पर उसकी प्रतिक्रिया में भी जाहिर हुई है। चीनी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा था- 'चीन गिनी में तख्ता पलट की कोशिशों का विरोध करता है। वह राष्ट्रपति अलफा कोंडे की तुरंत रिहाई की मांग करता है।' पर्यवेक्षकों के मुताबिक चीन का ये रुख उसके आम दावे के खिलाफ है। चीन का दावा रहा है कि वह किसी देश के अंदरूनी घटनाक्रम पर टिप्पणी नहीं करता। इसलिए गिनी के मामले में उसके अलग रुख के पीछे ऐल्यूमिनियम उद्योग से जुड़ी उसकी चिंता को कारण माना गया है।
ऐल्यूमिनियम का उपयोग कई उत्पादों में होता है। इनमें ऑटोमोबाइल के पुर्जों के साथ-साथ ड्रिंक्स के कैन भी शामिल हैं। ये सारे उत्पाद चीन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। जानकारों के मुताबिक अब तक गिनी के बॉक्साइट खदानों में कामकाज पर कोई फर्क नहीं पड़ा नहीं है। इसके बावजूद सोमवार से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 18 महीनों के सबसे ऊंची सीमा तक जा पहुंची है। जानकारों के मुताबिक गिनी में तख्ता पलट के पहले से ही ऐल्यूमिनियम की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से चढ़ रही थी। इसकी वजह चीन में सूखे की वजह से ऐल्यूमिनियम उत्पादन में आई रुकावटें थीं। अब बॉक्साइट की कमी होने का भी अंदेशा पैदा हो गया है।
चीन में 55 फीसदी बॉक्साइट आयात गिनी से
वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जनवरी से जुलाई तक चीन ने बॉक्साइट का जितना आयात किया, उसका 55 फीसदी हिस्सा गिनी से आया था। इसी अवधि में इस आयात में ऑस्ट्रेलिया से आए बॉक्साइट का हिस्सा 55 प्रतिशत रहा। जानकारों के मुताबिक चीन ने इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में हाल में कई बड़ी परियोजनाएं शुरू की हैं। उन सबमें ऐल्यूमिनियम की जरूरत होगी। इसीलिए गिनी की घटनाओं ने चीन को चिंता में डाल दिया है।
चीन लौह अयस्क के आयात के लिए भी गिनी को एक प्रमुख स्रोत के रूप में देख रहा था। फिलहाल चीन में होने वाले लौह अयस्क के आयात का 60 प्रतिशत हिस्सा ऑस्ट्रेलिया से आता है। रणनीतिक कारणों से चीन ऑस्ट्रेलिया पर अपनी निर्भरता घटाना चाहता है। इसीलिए छोटे से अफ्रीकी देश की घटनाएं उसके लिए अहम हो गई हैं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीन ने तख्ता पलट का विरोध कर नए सैनिक शासकों को नाराज कर दिया है। इससे भी उसकी मुश्किल बढ़ सकती है।