पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान
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पाकिस्तान के बहुचर्चित सिफर मामले (गुप्त राजनयिक केबल) में विशेष अदालत ने इमरान खान और उनके सहयोगी शाह महमूद कुरैशी के खिलाफ बंद कमरे में सुनवाई की अनुमति दे दी है। दरअसल, संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने विशेष अदालत के न्यायाधीश अबुल हसनत जुल्कर नैन से इस मामले की सुनवाई बंद कमरे में करने की अपील की थी। जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। बता दें कि इमरान खान वर्तमान में सिफर मामले में न्यायिक रिमांड पर रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं।
बंद कमरे में होगी इमरान के खिलाफ सुनवाई
बता दें कि सिफर मामले में पिछले महीने दिए गए फैसले में कहा गया था कि इस मुकदमे की कार्यवाही अदियाला जेल में खुली अदालत में जारी रहेगी। इसके बावजूद गुरुवार को जब इस मामले में सुनवाई की गई तब सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई बंद कमरे में की जाएगी। इस दौरान, उन्होंने संदिग्धों के परिवार के सदस्यों को सुनवाई में शामिल होने की अनुमति दी। अब इसकी अगली सुनवाई शुक्रवार को दोबारा की जाएगी।
कुरैशी की बेटी ने किया विरोध
अदालत के इस फैसले का विरोध करते हुए कुरैशी की बेटी मेहरबानो कुरेशी ने कहा कि खुली अदालत में मुकदमे की सुनवाई न्याय की आवश्यकता थी। इस पर राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो के अभियोजक रिजवान अब्बासी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर यह मामला गोपनीय नहीं होता तो एफआईआर नहीं होती। कोई गोपनीय बात सार्वजनिक कैसे हो सकती है?
इस्लामाबाद हाई कोर्ट से इमरान को झटका
इस बीच, इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने सिफर ट्रायल पर तत्काल रोक लगाने की मांग करने वाली इमरान खान की याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में प्रतिवादियों से 20 दिसंबर तक रिपोर्ट मांगी गई थी। न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगजेब ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पार्टियों द्वारा अपनी रिपोर्ट सौंपने के बाद अदालत याचिका की समीक्षा करेगी।
इमरान पर हैं ये आरोप
दरअसल, पाकिस्तान के बहुचर्चित सिफर मामले (गुप्त राजनयिक केबल) में इमरान खान पर गंभीर आरोप लगे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री पर आरोप है कि अगस्त 2018 से अप्रैल 2022 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने के दौरान उन्होंने सिफर की सामग्री का दुरुपयोग किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले साल दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के ब्यूरो के सहायक सचिव डोनाल्ड लू और पाकिस्तानी दूत असद मजीद खान सहित अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों के बीच एक बैठक का विवरण था।
इमरान खान पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ साजिश रचने की कहानी गढ़ी। एफआईए ने 15 अगस्त को देश के गुप्त कानूनों का उल्लंघन करने के आरोप में सिफर मामला दर्ज किया था। एफआईए ने 30 सितंबर को खान और कुरेशी के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। एफआईए ने आरोप पत्र में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धारा 5 और 9 को शामिल किया है जिसके तहत दोषी पाए जाने पर मौत की सजा या दो से 14 साल की कैद हो सकती है। खान और कुरैशी को शुरुआत में 23 अक्टूबर को इस मामले में दोषी ठहराया गया था। दोनों ने खुद को निर्दोष बताया था।