अमेरिका में बॉबी चावला नाम के भारतीय मूल के शख्स को क्रिसमस से ठीक पहले उनका मकान वापस मिल गया है। उनके परिवार ने 22 महीने पहले एक बैंक नीलामी में घर खरीदा था। हालांकि, अतिक्रमण और धौंस दिखाने के इस मामले में बैरी और बारबरा पोलाक ने घर छोड़ने से इनकार कर दिया था। न्यूयॉर्क पोस्ट में खबर प्रकाशित किए जाने के बाद इस मामले में दंपती को घर खाली करना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक घर पर कब्जा करने वाले दो लोग (दंपती) क्रिसमस से ठीक पहले घर छोड़कर चले गए।
इस मामले का सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि घर पर कब्जा जमाने वाली दंपती ने एक दशक से भी अधिक समय से अपने बंधक का भुगतान नहीं किया। घटना से जुड़ी एक वीडियो में चावला परिवार को 'पाकिस्तान वापस जाने' के लिए कहते हुए सुना गया। खबर के मुताबिक पोलाक दंपती ने सितंबर 1990 में 2,55,000 डॉलर में घर खरीदा था। 2006 में उन्हें कुछ वित्तीय परेशानी हुई। इसके बाद वे बैंक के पैसे नहीं लौटा सके।
बैंक को पैसे का भुगतान करना बंद होने के बाद बैंक ने घर की नीलामी का फैसला लिया। दंपती ने घर खाली न करना पड़े, इसके लिए तमाम दांव-पेंच अपनाए। अदालतों में घर में कंकाल मिलने जैसी दलीलें दी गईं। खुद को दिवालिया घोषित करने की कवायद भी हुई। पेचीदा मामले को देखते हुए अदालत ने निष्कासन आदेश पर 17 वर्षों तक रोक लगा दी। इस कारण पोलाक दंपती लगभग दो दशकों तक बिना भुगतान के ही न्यूयॉर्क के उस घर में रहे।
2008 में दंपती पर फौजदारी का मुकदमा दायर हुआ। आखिरकार बैंक घर की नीलामी कराने में सफल रहा। 11 साल तक खिंचे इस मामले में अमेरिका के संघीय न्यायाधीश (दिवालियापन के मामले में) ने पिछले सप्ताह पोलाक दंपती को याचिका दायर करने से रोक दिया। अदालती कार्रवाई के बावजूद दंपती ने घर खाली करने से इनकार कर दिया। न्यूयॉर्क पोस्ट की खबर के बाद अदालती प्रणाली का दुरुपयोग उजागर हुआ। दंपती अंततः शुक्रवार को बाहर चली गई और न्यूयॉर्क का घर खाली हो गया।
घर वापस मिलने के बाद बॉबी चावला ने कहा, उन्हें क्रिसमस पर चमत्कार जैसा एहसास हो रहा है। घर कब्जा मुक्त हो चुका है, उन्हें इस पर भरोसा नहीं हो रहा है। चावला ने कहा, अभी भी न्यायाधीश की मंजूरी के बिना आधिकारिक तौर पर वह घर में नहीं रह सकते। लेकिन थोड़ी राहत जरूर मिली है। असंतोष का इजहार करते हुए उन्होंने कहा, 'वह तब तक संतुष्ट नहीं होंगे जब तक अपने घर पर कब्जा नहीं मिल जाता। दंपती पर भरोसा नहीं किया जा सकता।'
चावला के वकील हीथ बर्जर ने कहा, अमेरिका में लोन लेने वाले अधिकांश देनदार ईमानदार और कड़ी मेहनत करने वाले व्यक्ति हैं। दिवालियापन की आड़ में पैसे न लौटाने की कोशिश कर रही दंपती देनदार नहीं है। वकील ने कहा, उन्हें अदालत से जल्द इंसाफ की उम्मीद है। उन्होंने दिवालियापन अदालत में आखिरी याचिका दायर कर दी है।