चीन की चालबाजियों से यूं तो पूरी दुनिया ही वाकिफ होती जा रही है। उसकी कथनी और करनी में फर्क एक नहीं बल्कि कई बार साफ नजर आता है। इस बार भी ऐसा ही सीमा विवाद पर भारत संग बातचीत का ढोंग रचाते हुए उसने फिर से पीठ में छुरा घोंप दिया। हमारे 20 जवान शहीद हुए लेकिन शहादत से पहले उन्होंने चीनी सेना को सबक सिखाया। उनके 47 के करीब सैनिक हताहत हुए।
देखा जाए तो चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साल 2017 में कम्युनिस्ट पार्टी के अधिवेशन में अपने भाषण के जरिए ही अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। अपने तीन घंटे लंबे भाषण में उन्होंने यूं तो पड़ोसियों संग बातचीत से सीमा विवाद सुलझाने की बात कही, लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर चेतावनी भी दे डाली। यही नहीं 2050 तक वैश्विक शक्ति बनने की अपनी योजना का विस्तार से वर्णन भी किया। जिनपिंग ने अपने इस भाषण में बता दिया कि चीन खुद को दुनिया के मंच पर केंद्रीय भूमिका में देख रहा है।
शी जिनपिंग ने अपने भाषण में कई उपलब्धियां गिनवाईं और भविष्य के लिए अपना रोडमैप बताया। उन्होंने कहा कि चीन एक नए युग में प्रवेश कर चुका है, जहां हमें दुनिया के केंद्रीय मंच पर अपनी जगह लेनी चाहिए।
दुनिया के केंद्रीय मंच पर जगह लेने की मंशा
लोकतंत्र के हमेशा खिलाफ रहे चीन ने इस भाषण के माध्यम से दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश की कि साम्यवाद ही नया विकल्प है। जिनपिंग ने कहा कि चीनी विशेषताओं के साथ साम्यवाद के तहत मुल्क ने तेजी से विकास किया। यह दिखाता है कि दूसरे मुल्कों के पास एक नया विकल्प है। उन्होंने कहा कि चीनी विशेषताओं के साथ साम्यवाद के मायने ये हुए कि आज चीन दुनिया में महान शक्ति बन गया। चीन का विकास मॉडल समृद्धिशील रहा। हम विकासशील देशों के लिए नए विकल्प के तौर पर उभरे हैं। अब वक्त आ गया है कि हम दुनिया के केंद्रीय मंच पर अपनी जगह लें और मानवजाति को अपना महान योगदान दें। साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि कम्युनिस्ट पार्टी हर उस बात का विरोध करेगी, जो चीन के नेतृत्व को नकारेगी।