कई चीनी निवेशकों ने कहा है कि वे अब कोई नई खरीदारी के पहले इंतजार करेंगे। वे देखेंगे कि चीन सरकार की कार्रवाई का ये दौर क्या मोड़ लेता है। बैंक ऑफ अमेरिका ने अब शेयर कारोबारियों को सलाह दी है कि वे चीन में खरीदारी ना करें। इसके बदले उन्हें ऑस्ट्रेलिया, जापान, भारत और दूसरे एशियाई देशों के शेयर बाजारों में पैसा लगाना चाहिए।
चीनी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि उनकी कार्रवाई अभी लंबे समय तक जारी रहेगी। बीते सोमवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि ‘साझा समृद्धि’ लाने के लिए एकाधिकार (मोनोपॉली) के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। चीनी मीडिया के मुताबिक शी ने अर्थव्यवस्था, वित्तीय क्षेत्र, संस्कृति और राजनीति में ‘गहरी क्रांति’ लाने पर जोर दिया है, ताकि ये धारणा टूट सके कि चीनी बाजार पूंजीपतियों का स्वर्ग हैं। इन कार्रवाइयों को देखते हुए ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने लिखा- ‘शी का चीन वह चीन नहीं रह गया है, जिसे निवेशक जानते थे।’
लेकिन गोल्डमैन शैक्स जैसी कई निवेश कंपनियां हैं, तो फौरी नुकसान के बावजूद चीन को लेकर उम्मीद बनाए हुई हैं। गोल्डमैन शैक्स ने अगस्त में एक टिप्पणी में लिखा कि अगर वैश्विक संदर्भ में देखें, तो अभी भी चीन में आर्थिक विकास और मुनाफे में वृद्धि की संभावनाएं मजबूत हैं। उसने ध्यान दिलाया कि चीन सरकार कई बुनियादी तकनीक के विकास में मददगार बन रही है। उनमें अक्षय ऊर्जा और 5जी नेटवर्क शामिल हैं।
फिडेलिटी इंटरनेशन में एशियाई इक्विटी की निदेशक विक्टोरिया मियो ने भी ऐसी ही राय जताई है। उन्होंने कहा है- ‘कुछ क्षेत्रों में नीति संबंधी उथल-पुथल के बावजूद चीन में अगले दशक तक जीडीपी की स्वस्थ दर जारी रहेगी।’ उनके मुताबिक इसकी वजह चीन के मध्य वर्ग की बढ़ रही आमदनी है।