जानकारों का कहना है कि इस रूझान का दूसरा बड़ा कारण अमेरिका में सप्लाई चेन की कमजोर स्थिति है। अमेरिका में मैनुफैक्चरिंग उपकरणों को बनाने वाली कंपनियों को मिलने वाले ऑर्डर आज लौट कर 1992 के स्तर पर पहुंच गए हैं। जबकि 1999 में उन कंपनियों को अब तक के सबसे ज्यादा ऑर्डर मिले थे। ताजा विश्लेषण में बताया गया है कि 2018 में ट्रंप प्रशासन ने कॉरपोरेट टैक्स में जो भारी कटौती की, उससे भी देश में निवेश नहीं बढ़ा। बल्कि कंपनियों ने टैक्स कटौती से हाथ में आई ज्यादा रकम का इस्तेमाल शेयर बाइ-बैक (अपने ही शेयरों को शेयर होल्डर्स से खरीदने) में किया। इससे शेयर बाजार में तेजी आई, लेकिन असली अर्थव्यवस्था को कोई फायदा नहीं हुआ।
ट्रंप के दौर में लगाए गए शुल्कों को बाइडन प्रशासन ने भी जारी रखा है। लेकिन उससे अमेरिकी मैनुफैक्चरिंग उद्योग को कोई फायदा नहीं पहुंचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस हाल में अमेरिका के पास चीन से ज्यादा आयात करने के अलावा कोई चारा नहीं है। अतिरिक्त शुल्कों का सिर्फ यह असर हुआ कि चीन से आई वस्तुओं के लिए अमेरिकी उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ी। उसकी वजह से देश में महंगाई दर बढ़ी है।
एशिया टाइम्स के मुताबिक कोविड महामारी के दौरान पहले ट्रंप प्रशासन और फिर बाइडन प्रशासन ने अमेरिका वासियों को 5.8 ट्रिलियन डॉलर की नकद सहायता दी थी। इससे घर बैठे लोगों के पास पैसा आया। उसकी वजह से चीजों की मांग बढ़ी। इस बढ़ी मांग का फायदा भी चीनी निर्यातकों को हुआ है।