हाल में जनसंख्या नीति में चीन में किए गए बदलावों के बावजूद यहां लैंगिक असंतुलन में मामूली सुधार ही हुआ है। ये बात खुद चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों से सामने आई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक चीन में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या तीन करोड़ से भी ज्यादा है। लेकिन साल 2000 से 2010 के बीच जन्मे बच्चों में यह असंतुलन और भी ज्यादा है। जानकारों ने कहा है कि विवाह की उम्र में पहुंचे नौजवानों के बीच भी असंतुलन की खाई बहुत चौड़ी हो गई है।
ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 2019 के आखिर में लैंगिक असंतुलन ज्यादा 10 से 14 वर्ष के उम्र के किशोरों के बीच था। 15 से 19 वर्ष के युवाओं के बीच भी स्थिति लगभग उतनी ही खराब थी। 10 से 14 वर्ष उम्र वर्ग में हर 100 लड़की पर 119 लड़के थे। 15 से 19 वर्ष उम्र वर्ग में हर 100 युवती पर 118 युवक थे।
जनसंख्या विशेषज्ञों के मुताबिक जब इन दोनों उम्र वर्गों के नौजवान 20 से 30 वर्ष के उम्र वर्ग में पहुंचेंगे, तब शादी एक गंभीर समस्या बन कर उनके सामने खड़ी होगी। खासकर इस समस्या से दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली आबादी को जूझना होगा। गरीबों के सामने ये मुश्किल अधिक गंभीर रूप में सामने खड़ी होगी।
कुछ वर्ष पहले तक स्थिति किस तरह बिगड़ी गई, इसका अंदाजा साल 2000 से पहले जन्म लोगों से उसके बाद जन्मे बच्चों की तुलना करने पर लगता है। अभी 20 से 24 वर्ष उम्र वर्ग के लोगों में हर 100 स्त्री पर 114 पुरुष हैं। जबकि 25 से 29 वर्ष की उम्र में हर 100 स्त्री पर 106 पुरुष हैं। जाहिर है, पहले लैंगिक असंतुलन कम था। लेकिन पिछले 20 वर्षों में यह तेजी से बढ़ा है। अभी 20 से 30 वर्ष उम्र वर्ग के लोगों में 11 पुरुषों के लिए विवाह के लिए स्त्री उपलब्ध नहीं होगी। आने वाले दशक में ऐसे लोगों की संख्या 18 तक पहुंच जाएगी।
समस्या की बढ़ती विकरालता को देखते हुए अब विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि दूसरे देशों की स्त्रियों से चीनी पुरुषों के विवाह को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। साथ ही चीन के अंदर भी एक से दूसरे इलाके के लोगों के बीच वैवाहिक संबंधों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
वैसे चीनी विशेषज्ञों ने यह ध्यान दिलाया है कि सभी उम्र वर्ग के लोगों को ध्यान में रखें, तो लैंगिक असंतुलन कम हुआ है। 2006 में स्त्रियों की तुलना में चार करोड़ से ज्यादा पुरुष थे। अब ये अंतर तीन करोड़ का रह गया है। चीन में महिलाओं की औसत उम्र पुरुषों से पांच साल ज्यादा है। इसलिए बुजुर्ग उम्र वर्ग में महिलाओं की संख्या हमेशा ज्यादा रही है।
इसके अलावा ये प्रगति इसलिए हुई, क्योंकि चीनी अधिकारियों ने जन्म पूर्व लिंग परीक्षण के खिलाफ पिछले डेढ़ दशक मे अधिक सख्त कार्रवाई की है। इसी का असर है कि सिचुआन प्रांत में अब महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा हो गई है। वहां हर 97 पुरुष पर 100 महिलाएं हैं।
इसका कारण बताते हुए शंघाई स्थित फुदान यूनिवर्सिटी में जनसंख्या एवं विकास नीति अध्ययन केंद्र के निदेशक पेंग शीझी ने चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स से कहा कि इस प्रांत में सबसे ज्यादा लंबी उम्र वाली आबादी है। यहां दूसरे राज्यों से सबसे ज्यादा बड़ी संख्या में युवा कर्मी कामकाज की तलाश में आए हैं। इसका असर वहां दिखा है। वैसे पेंग शीझी ने कहा कि हाल में पूरे देश में प्रगति हुई है। शून्य से 4 वर्ष उम्र वर्ग के शिशुओं में हर 100 बच्चियों पर 113 बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ये प्रगति इसी तरह जारी रही तब भी चीन को लैंगिक असंतुलन खत्म करने में 50 से 60 साल लग जाएंगे।