अफगानिस्तान में बिगड़ते हालात के बीच चीन ने बड़ा बयान दिया है। समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार चीन ने कहा है कि वह तालिबान के साथ 'दोस्ताना संबंध' विकसित करने के लिए तैयार है। चीन ने आगे कहा कि वह अफगान नागरिकों के स्वतंत्र निर्णय का का सम्मान करता है और तालिबान के साथ मैत्रीपूर्ण और सहयोगी संबंध विकसित करने के लिए तैयार है।
बता दें कि चीन ने पहले ही संकेत दिया था कि वह अफगानिस्तान में तालिबान शासन को स्वीकार करेगा। 28 जुलाई को, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने नौ सदस्यीय तालिबान प्रतिनिधिमंडल के साथ तियानजिन में औपचारिक रूप से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में तालिबान के सह-संस्थापक और उप नेता मुल्ला अब्दुल गनी बरादर भी शामिल थे।
विदेश मंत्री वांग ने समूह को अफगानिस्तान में एक महत्वपूर्ण सैन्य और राजनीतिक बल के रूप में मान्यता दी थी। वहीं अपने इस फैसले पर उन्होंने कहा था कि उनके इस कदम से देश की शांति, सुलह और पुनर्निर्माण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।
तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्जा
बता दें कि अफगानिस्तान पर 20 साल के बाद एक बार फिर तालिबान का कब्जा हो गया है। उसने देश के राष्ट्रपति भवन पर भी कब्जा जमा लिया है। टोलो न्यूज के मुताबिक, यहां सत्ता हस्तांतरण की प्रकिया भी पूरी हो गई है। राष्ट्रपति अशरफ गनी ने तालिबान को सत्ता सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक, नई अंतरिम सरकार के अंतरिम प्रमुख के रूप में अली अहमद जलाली का नाम सबसे आगे चल रहा है।