चीन ने तालिबान द्वारा उसे अफगानिस्तान का बगराम एयरबेस सौंपने की योजना को लेकर हाल ही में मीडिया में आई खबर को पूरी तरह फर्जी करार दिया है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने मंगलवार को मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'मैं आपसे कह रहा हूं, यह खबर पूरी तरह फर्जी है।' चीन के प्रवक्ता से पूछा गया था कि क्या बगराम एयरबेस चीन को कंधार एयरपोर्ट पाकिस्तान को सौंपा जा रहा है? चीन के प्रवक्ता ने ऐसे किसी प्रस्ताव से साफ इनकार किया।
जुलाई में बगराम एयरबेस को अमेरिकी सेना ने खाली कर दिया था। अफगानिस्तान में करीब 20 साल तक अमेरिकी सेना ने इसी एयरबेस को अपना मुख्य ठिकाना बनाया था। यहां हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात रहे थे।
निक्की हैली ने जताई आशंका
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व दूत निक्की हैली ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि चीन बगराम एयरबेस हथियाने की कोशिश कर रहा है। एक टेलीविजन इंटरव्यू में हैली ने यह बात कही थी। उन्होंने कहा था, 'हमें सतर्क रहने की जरूरत है, मैं सोचती हूं कि चीन बगराम एयरबेस पर काबिज होने वाला है।'
तालिबान व चीन की बढ़ती नजदीकियों पर किया आगाह
निक्की हैली ने तालिबान और चीन की बढ़ती नजदीकियों पर चिंता जाहिए करते हुए चेतावनी दी थी। उनका मानना है कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद चीन अफगान धरती का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करना चाहेगा। पूर्व वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन अब बगराम एयरफोर्स बेस को हथियाने की हरसंभव कोशिश करेगा। इसकी मदद से वो पाकिस्तान को भारत के खिलाफ मजबूत करना चाहेगा।
हैली ने कहा था कि हमें चीन पर पहले से ज्यादा सतर्कता से नजर रखनी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि अब चीन अफगानिस्तान के जरिए अपने मंसूबे पूरा करना चाहेगा। अब तक वह पाकिस्तान के जरिए भारत पर दबाव नहीं बना रहा था, लेकिन अब वह बगराम एयरफोर्स बेस के जरिए पाकिस्तान का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करने की कोशिश करेगा। ऐसे में अमेरिका के सामने सिर्फ अंदरूनी ही नहीं, वैश्विक मुददों से निपटने की ताकत भी होनी चाहिए।
राष्ट्रपति बाइडन से किया यह आग्रह
पूर्व अमेरिकी राजनयिक हैली ने कहा था कि यह समय है कि राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रशासन भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे अपने प्रमुख सहयोगियों को आश्वस्त करें कि अमेरिका उनकी मदद करेगा। आपको सबसे पहले जो करना चाहिए, वह है जल्द से जल्द अपने दोस्तों के साथ जुड़ना, उनके साथ खड़ा होना। फिर चाहे वह ताइवान हो, यूक्रेन हो, इस्राइल हो, भारत हो, ऑस्ट्रेलिया हो या फिर जापान हो।