रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने हाल ही में हुमला जिले में चोरी छिपे कुछ निर्माण कार्य कराए हैं। यही नहीं, अब नेपाली नागरिकों को वहां प्रवेश करने नहीं दिया जा रहा।
चीन भले ही खुद को काठमांडो का सदाबहार दोस्त बताता हो मगर वह उसे भी धोखा देने से बाज नहीं आया। रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने नेपाल के हुमला जिले की जमीन पर पिछले साल कब्जा कर लिया। मजबूरन नेपाल सरकार ने बीजिंग के साथ सीमा मुद्दे को सुलझाने के लिए एक कमेटी का गठन किया है।
विज्ञापन
हालांकि नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली चीन की ओर से नेपाल की जमीन हड़पने की रिपोर्ट को खारिज करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल का चीन के साथ कोई सीमा विवाद नहीं है।
दरअसल, हाल ही में नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने चीन के साथ सीमा विवाद को सुलझाने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी हुमला जिले के लिमि लेपचा से नामखा के हिल्सा तक नेपाल और चीन के बीच सीमा विवाद का अध्ययन करेगी।स्थानीय नागरिक लगातार यहां चीन की ओर से नेपाल की भूमि के अतिक्रमण का दावा कर रहे हैं।
विज्ञापन
नेपाल की सीमा के दो किलोमीटर भीतर बनाईं इमारतें
यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब स्थानीय गांव परिषद के अध्यक्ष विष्णु बहादुर लामा क्षेत्र का दौरा करने गए। उन्होंने देखा कि चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) ने नेपाल की सीमा के करीब दो किलोमीटर भीतर नई इमारतें बनाई हैं।
सूचना मिलने पर हुमला के सहायक मुख्य जिला अधिकारी (सीडीओ) दलबहादुर हमाल ने मामले की जांच की। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में चीन की ओर से नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण की पुष्टि की।
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पिलर संख्या 11,12 को भी बदला
इंटरनेशनल फोरम फॉर राइट्स एंड सिक्योरिटी (आईएफएफआरएएस) के मुताबिक नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण की रिपोर्ट के बीच पूर्व मंत्री जीवन बहादुर शाही के नेतृत्व में 19 सदस्यों की टीम ने 11 दिनों तक क्षेत्र का निरीक्षण किया।
इस टीम में राजनेता, पत्रकार और सिविल सोसायटी के सदस्य थे। इस टीम ने पाया कि वहां चीन ने नेपाल की सीमा के भीतर कुछ इमारतें बनाई हैं और एकतरफा ढंग से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पिलर संख्या 11,12 को भी बदल दिया है।