बीते जून में अमेरिकी सीनेट ने यूनाइटेड स्टेट्स इनोवेशन एंड कॉम्पिटीशन एक्ट पारित किया था। उसका मकसद सेमीकंडक्टर और कुछ दूसरी तकनीकों के साथ-साथ एआई विकास भी है। इस कार्य के लिए 250 अरब डॉलर का बजट अमेरिकी कांग्रेस (संसद) ने मंजूर किया है। तब भी कुछ विशेषज्ञों ने कहा था कि इस मामले में अमेरिका अब जागा है, जबकि चीन इसमें काफी बढ़त बना चुका है। दरअसल, ये बात तब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी स्वीकार की थी। उन्होंने कहा था- ‘हमारे सामने 21वीं में विजयी रहने की होड़ है, जिसमें पहला गोला दागा जा चुका है।’
ताजा चर्चा पेंटागन के सॉफ्टवेयर प्रमुख रह चुके निकोलस चेलियान के बयान से छिड़ी है। चेलियान का एक इंटरव्यू ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स में छपा है। उसमें उन्होंने कहा कि चीन एआई के मामले में बहुत आगे निकल चुका है। उन्होंने कहा- ‘अगले 15 से 20 साल तक हमारे लिए चीन का मुकाबला करने की कोई संभावना नहीं है।’ उन्होंने मौजूदा हालात को एक ऐसी स्थिति बताया, जिसमें कौन विजेता है, इसका फैसला हो चुका है। उन्होंने कहा- ‘मेरी राय में चीन और अमेरिका के बीच की होड़ खत्म हो चुकी है।’
चेलियान ने कहा कि उनकी राय में चीन का दुनिया में दबदबा इसलिए बढ़ रहा है, क्योंकि उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग (मशीन के स्वतः सीखने), और साइबर क्षमताओं के क्षेत्र में तरक्की की है। जबकि उन्होंने अमेरिका की साइबर सुरक्षा क्षमताओं को अमेरिका सरकार के कुछ विभागों के मामले में ‘किंडर गार्डेन स्तर का’ बताया। चेलियान ने हाल ही में अमेरिका में टेक्नोलॉजी परिवर्तन के क्षेत्र में धीमी रफ्तार पर अपना विरोध जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद उन्होंने अपनी राय पहली बार फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बताई है।