मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
- फोटो : ANI
आर्थिक संकट से जूझ रहे मालदीव की मदद के लिए चीन तैयार हो गया है। मंगलवार को मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर ने मालदीव में इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा परियोजनाओं में सहयोग के लिए चीन अंतरराष्ट्रीय विकास सहयोग एजेंसी (सीआईडीसीए) के अध्यक्ष लुओ झाओहुई के साथ बैठक की। इसमें दोनों देशों में सहमति बनी। चीन के विदेश मंत्री मूसा जमीर ने बताया कि दोनों देशों के बीच माले और विल्लमले रोड प्रोजेक्ट को लेकर भी मंथन हुआ और विनिमय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। मालदीव के विदेश मंत्रालय ने इस बैठक को देश के सतत विकास के लिए अहम बताया।
विदेश मंत्री जमीर ने मालदीव और सीआईडीसीए के बीच हुई साझेदारी को नए अवसरों की खोज बताया। विदेश मंत्री ने कहा कि चीन की मदद से मालदीव की स्थिति में सुधार आएगा। इसका मालदीव के लोगों को लाभ मिलेगा। इससे पहले जमीर ने एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) के निदेशक मंडल के अध्यक्ष और अध्यक्ष जिन लिकुन के साथ अपनी बैठक की। उन्होंने वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट में एआईआईबी के समर्थन की सराहना की। मालदीव के विदेश मंत्री चीन एक्जिम बैंक के अध्यक्ष वू फुलिन से भी मुलाकात की और आर्थिक सुधार को लेकर चर्चा की। बता दें कि सोमवार को विदेश मंत्री मूसा जमीर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी और उन्हें मालदीव में आर्थिक और वित्तीय स्थिति के बारे में जानकारी दी थी।
मुइज्जू ने चीन के साथ किए थे कई समझौते
पिछले साल मालदीव की सत्ता संभालने वाले मोहम्मद मुइज्जू, जिन्हें व्यापक रूप से चीन समर्थक नेता माना जाता है, के सत्ता में आने के बाद से चीन ने मालदीव के साथ अपने संबंधों को बढ़ाया है। वहीं मुइज्जू ने अपनी बीजिंग यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक सहकारी साझेदारी तक बढ़ाया और 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे।
आईएमएफ ने मालदीव को दी थी चेतावनी
बता दें कि मालदीव को मई में, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी थी कि अगर देश ने महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव नहीं किए गए तो उस पर ऋण संकट का भारी खतरा है। इसके बाद, मुइज्जू सरकार ने चीन से ऋणों के पुनर्गठन की मांग की। जानकारी के अनुसार मालदीव का चीन पर ऋण कथित रूप से 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है।