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Britain: भारत-कनाडा विवाद के बीच ब्रिटेन के पीएम ने ट्रूडो से की बातचीत, 'कानून व्यवस्था के महत्व' पर दिया जोर

Tue, 15 Oct 2024 10:29 PM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

Britain: भारत-कनाडा विवाद के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कनाडा के राष्ट्रपति जस्टिन ट्रूडो से फोन पर बातचीत की। Britain: भारत-कनाडा विवाद के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कनाडा के राष्ट्रपति जस्टिन ट्रूडो से फोन पर बातचीत की। जिस दौरान पीएम स्टारमर ने कानून व्यवस्था के महत्व पर सहमति जताई।जिस दौरान पीएम स्टारमर ने कानून व्यवस्था के महत्व पर सहमति जताई।  
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ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (फाइल) - फोटो : एएनआई / रॉयटर्स
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विस्तार
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भारत और कनाडा के बीच चल रहे कूटनीतिक विवाद के बीच सोमवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कनाडा के राष्ट्रपति जस्टिन ट्रूडो से फोन पर बातचीत की। जिस दौरान पीएम स्टार्मर ने कानून व्यवस्था के महत्व पर सहमति जताई। हालांकि ब्रिटेन द्वारा जारी आधिकारिक बयान में भारत का जिक्र नहीं है। लेकिन इस बयान में उन आरोपों का जिक्र किया गया है जिसको लेकर कनाडा में जांच चल रही है। 
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ब्रिटेन के पीएम की ट्रूडो से बातचीत
भारत और कनाडा विवाद के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार शाम कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से बात की। उन्होंने कनाडा में जांच के तहत आरोपों के संबंध में हाल के घटनाक्रमों पर चर्चा की। दोनों ने कानून व्यवस्था के महत्व पर सहमति जताई। बता दें कि ब्रिटेने के पीएम कीर-स्टामर का ये फ सोमवार शाम को यह फोन कॉल ऐसे समय में आया जब भारत ने छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया और कनाडा में अपने उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा को वापस बुला लिया, और ओटावा के आरोपों को बेतुका और वोट बैंक की राजनीति पर केंद्रित राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बताया।

विदेश मंत्रालय का बयान
वहीं इस मामले में भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह दर्शाया गया है कि उग्रवाद और हिंसा के माहौल में ट्रूडो सरकार की कार्रवाइयों ने उनकी सुरक्षा को खतरे में डाला। हमें उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान कनाडाई सरकार की प्रतिबद्धता पर कोई भरोसा नहीं है। इसलिए, भारत सरकार ने उच्चायुक्त और अन्य लक्षित राजनयिकों और अधिकारियों को वापस बुलाने का फैसला किया है। इसके साथ ही बयान में यह भी बताया गया कि भारत के खिलाफ उग्रवाद, हिंसा और अलगाववाद के लिए ट्रूडो सरकार के समर्थन के जवाब में भारत आगे कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।  
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