बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने मंगलवार को चेतावनी दी कि वह देश में अशांति पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी। देश इस समय राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि कुछ शरारती तत्वों की तोड़फोड़, आगजनी, अवैध तलाशी, लूटपाट और वसूली जैसी गतिविधियों के कारण अशांति पैदा हो रही है।
अधिसूचना में कहा गया कि अशांति पैदा करने के लिए कुछ समूह पुलिस मुकदमे दर्ज करने का दबाव डाल रहे हैं और अदालत में आरोपियों पर हमले कर रहे हैं। सरकार ने आश्वासन दिया कि मामला दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि गलत तरीके से गिरफ्तारियां की जाएंगी। इसमें आगे कहा गया, सभी मामलों की ठीक से जांच की जाएगी और उचित कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने कहा कि वह सभी अपराधियों की पहचान करेगी और वे किसी पार्टी से जुड़े हैं, इसकी चिंता किए बिना उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।
बांग्लादेश में जुलाई के मध्य में विवादास्पद आरक्षण प्रणाली को लेकर छात्रों ने बड़े पैमाने विरोध प्रदर्शन किए। इस आरक्षण प्रणाली के तहत 1971 के आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सैनिकों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरियों में 30 फीसदी आरक्षण का प्रावधान था। बाद में छात्रों के ये प्रदर्शन तेज हुए तो बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की बेटी शेख हसीना को प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देना और देश छोड़कर भारत भागना पड़ा।
हसीना की सरकार के पतन के बाद देशभर में हुई हिंसा की घटनाओं में 230 से अधिक लोगों की मौत हुई। जिससे मरने वालों की कुल संख्या 600 से अधिक हो गई है। हसीना के बाद अब नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मोहम्मद यूनुस ने नई अंतरिम सरकार की बागडोर संभाली है।