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एलजीबीटी कार्यकर्ता की हत्या: बांग्लादेश की कोर्ट ने पूर्व सेना प्रमुख समेत पांच उग्रवादियों को सुनाई मौत की सजा

Tue, 31 Aug 2021 05:06 PM IST
प्रशांत कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

अप्रैल 2016 में, इस्लामिक उग्रवादियों ने बांग्लादेश की पहली समलैंगिक अधिकार पत्रिका के संपादक जुल्हाज मन्नान की हत्या कर दी थी। मन्नान और उनके दोस्त महबूब रब्बी टोनॉय यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट के लिए काम कर रहे थे। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बांग्लादेश के आतंकवाद निरोधी अदालत ने समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता और उसके दोस्त की निर्मम हत्या के मामले में मंगलवार को पूर्व सेना प्रमुख समेत छह इस्लामी उग्रवादियों को मौत की सजा सुनाई है। आतंकवाद रोधी विशेष न्यायाधिकरण के न्यायाधीश मोहम्मद मजीबुर रहमान ने कहा, "उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई है। 2016 में ढाका के एक अपार्टमेंट में दोनों की निर्मम हत्या की गई थी। ढाका में उस समय विदेशियों, धार्मिक अल्पसंख्यकों और धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगर्स को निशाना बनाकर हमले किए जा रहे थे। 

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अप्रैल 2016 में, इस्लामिक उग्रवादियों ने बांग्लादेश की पहली समलैंगिक अधिकार पत्रिका के संपादक जुल्हाज मन्नान की हत्या कर दी थी। मन्नान और उनके दोस्त महबूब रब्बी टोनॉय यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट के लिए काम कर रहे थे। 

आठ आरोपियों में से दो आरोपी बरी
न्यायाधीश ने कहा कि वह मौत की सजा दे रहे हैं, क्योंकि एलजीबीटी कार्यकर्ता और उसके दोस्त की हत्या करके किए गए जघन्य अपराधों के कारण दोषियों पर दया दिखाने की कोई गुंजाइश नहीं है।हालांकि, अदालत ने आठ में से दो आरोपियों को बरी कर दिया, जिन्हें शुरू में आरोपी बनाया गया था, जबकि चार दोषियों को 2015 में एक लेखक और प्रकाशक फैसल अरेफिन दीपन की हत्या के एक अन्य मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट ने आतंकवादी समूह अंसार-अल-इस्लाम को गैरकानूनी घोषित कर दिया। अंसार-अल-इस्लाम खुद को भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा से संबद्ध है, जिसमें बर्खास्त सैन्य मेजर जियाउल हक इसके सशस्त्र विंग के नेता हैं। 

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