अजरबैजान और अर्मेनियाई सेना के बीच पांच दिन से जारी भीषण झड़पों के बीच दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के युद्ध विराम के आग्रह को भी दरकिनार कर दिया है। इस बढ़ते तनाव के बीच नाटो के सहयोगी देश फ्रांस और तुर्की ने भी नाराजगी जताई है। नागोरनो-काराबाख के क्षेत्र पर कब्जे को लेकर दोनों देश एक दूसरे पर गोलाबारी करते रहे।
इस युद्ध में अब तक दर्जनों लोग मारे गए हैं और सैकड़ों जख्मी हो चुके हैं। लेकिन इस जंग को लेकर रूस और तुर्की भी आमने-सामने आ सकते हैं। पूर्व सोवियत गणराज्य अजरबैजान और अर्मेनिया के बीच युद्ध को लेकर यूरोपीय देश भी संयुक्त राष्ट्र पहुंच चुके हैं।
नारोरनो-बाराबाख क्षेत्र के रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि बृहस्पतिवार को 23 और लोग इस जंग की भेंट चढ़ चुके हैं। इस बीच, दोनों ही देशों ने युद्ध रोकने और शांति के साथ समस्या का हल निकालने की विश्व समुदाय की अपील को ठुकरा दिया है।
अर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोलस पशिनियन ने साफ कर दिया है कि वह अजरबैजान के साथ वार्ता के लिए तैयार नहीं हैं। दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे को बड़ा नुकसान पहुंचाने का दावा कर रही हैं। बताया जा रहा है कि अब तक इस युद्ध में 100 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।
तुर्की पर उकसावे का आरोप
अर्मेनिया ने आरोप लगाया है कि तुर्की उकसावे वाली कार्रवाई कर रहा है और उसके लड़ाकू विमान ने अर्मेनियाई हवाई सीमा का उल्लंघन किया है। वहीं, अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसके सैनिकों ने अर्मेनिया के कई टैंक, कुछ गोला-बारूद डिपो और सैन्य वाहनों को नष्ट कर दिया है। अर्मेनिया पर अजरबैजान के नागरिक इलाकों को भी निशाना बनाने का आरोप है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता यह है कि यदि दो देशों की इस लड़ाई में रूस जैसी महाशक्तियां शामिल हो जाती हैं, तो विश्व युद्ध जैसे हालात पैदा हो जाएंगे। अमेरिका समेत कई देशों ने अर्मेनिया और अजरबैजान से युद्ध समाप्त करने के अपील की है। पिछले पांच दिनों से जारी इस जंग में अब रूस, तुर्की, फ्रांस, ईरान और इस्राइल के भी शामिल होने का खतरा बढ़ गया है।