भारत और ईरान ने चाबहार बंदरगाह को लेकर सोमवार को दस साल के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। इसके कुछ ही घंटों के बाद अमेरिका ने चेतावनी दी कि कोई भी तेहरान के साथ व्यापारिक सौदे करने का विचार बना रहा है, तो उसे संभावित प्रतिबंधों के जोखिम के बारे में पता होना चाहिए। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा कि वह भारत सरकार को अपनी विदेश नीति के लक्ष्यों पर बोलने देंगे।
पटेल ने कहा, मैं सिर्फ इतना कहूंगा..ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू रहेंगे और हम उन्हें लागू करना जारी रकेंगे। कोई भी संस्था अगर ईरान के साथ व्यापार सौदों पर विचार कर रहा है, तो उन्होंने इस जोखिम के बारे में पता होना चाहिए कि प्रतिबंध लग सकते हैं।
चाबहार बंदरगाह के संचालन के लिए भारत के इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) और ईरान के पोर्ट एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (पीएमओ) के बीच द्विपक्षीय अनुबंध पर हस्ताक्षर हुए। इससे दस वर्षों की अवधि के लिए चाबहार विकास परियोजना में शाहिद-बेहस्ती बंदरगाह का संचालन हो पाएगा। दस साल की अवधि में दोनों पक्ष चाबहार में अपने सहयोग को आगे बढ़ाएंगे। आईपीजीएल बंदरगाह को लैस करने के लिे करीब 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगा।
भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए 250 मिलियन डॉलर की क्रेडिट विंडो का भी ऑफर दिया है। वर्तमान में चाबहार बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) के साथ एकीकृत करने की योजना पर काम चल रहा है, जिससे ईरान के जरिए रूस के साथ भारत की कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी।
यह दस वर्षों का दीर्घकालिक समझौता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजतबूत करेगा। इसके साथ ही क्षेत्र में व्यापारिक समुदायों के बीच भरोसे को बढ़ाएगा। चाबहार बंदरगाह विकास और संचाल में भारत एक प्रमुख खिलाड़ी है। यह परियोजना अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण पारगमन बंदरगाह के रूप में काम करेगा। यह लैंडलॉक देश हैं। भारत सरकार ने बंदरगाह के बुनियादी ढांचे में निवेश किया है और इसकी सुविधाओं को उन्नत बनाने पर काम कर रहा है।